Thursday, May 23, 2024
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Opinion: धारा 370 हटी, 4 साल में बदल गई जम्मू-कश्मीर की फिजा!

पिछले दिनों पीएम मोदी ने कहा था कि चाहे लोकतंत्रिक मुल्यों पर चलने की बात हो या फिर विकास की राह पर आगे बढ़ने की बात, जम्मू कश्मीर पूरे देश के सामने एक नया उदाहरण बन कर सामने आ रहा है. पिछले 2-3 सालों में बहुआयामी विकास की राह जो जम्मू कश्मीर ने पकड़ी है, वो आजादी के अमृतकाल में ये राज्य विकास की नयी कहानी लिख रहा है. पीएम गलत नहीं है. धारा 370 हटाए जाने के बाद के सरकारी आंकडों को देखें तो इज ऑफ लिविंग के मामले में जम्मू कश्मीर सबसे बेहतर काम करने वाले राज्यों में से एक बन गया है.

जम्मू कश्मीर में पीएम आवास योजना का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है, ई-ऑफिस का शत प्रतिशत क्रियान्वयन हो चुका है, ई-गवर्नेंस में संघ शासित क्षेत्रों में जम्मू कश्मीर शीर्ष पर है. पूरा राज्य ओडीएफ यानि खुली शौच मुक्त घोषित किया जा चुका है, कोविड के मैनेजमेंट में राज्य अव्वल रहा था. ग्रामीण स्कूलों, आंगनबाडी, हस्पतालों में सौ फीसदी पानी पहुंचाया जा चुका है. एक साल में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट पूरा करते हुए कुल 92,560 योजनाएं पूरी की गईं. सबसे खास बात ये कि पिछले साल जम्मू कश्मीर ने सबसे ज्यादा एयर ट्रैफिक देखा तो स्कूलों में अब तक के सबसे ज्यादा दाखिले हुए. विकास के कामों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि अब यही कहा जा सकता है कि धारा 370 हटने के चंद सालों बाद ही जम्मू कश्मीर विकास की राह पर बढ़ चला है और कश्मीर देश की मुख्य धारा में जुड़ता जा रहा है.

सड़कों और रेलवे का जाल अब पूरे राज्य में फैलने लगा है. 2021-22 में पीएम ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत लक्ष्य प्राप्त करने में कश्मीर देश में तीसरे नंबर पर रहा था. 8:45 किमी काजीगुंड-बनिहाल टनल पूरी की जा चुकी है. श्रीनगर से सोनमर्ग की साढ़े छह किमी लंबी Z मोड़ टनल दिसंबर 2023 तक पूरी हो जाएगी. अब दिल्ली से कटरा 5 घंटों में पहुंच सकेंगे. केंद्र ने 6 लेन के एक्स्प्रेस वे पर तेजी से काम शुरू कर दिया है.

गुड गवर्नेंस में अव्वल बना कश्मीर
तभी तो गृहमंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर सरकार की पीठ थपथपाते नहीं थकते. अमित शाह ने कहा था कि जम्मू कश्मीर भारत के शीर्ष राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में है जहां केन्द्र की योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है. जम्मू कश्मीर देश का पहला राज्य बना जिसने जिला स्तर पर हर जिले के लिए गुड गवर्नेंस इंडेक्स बनाया. इसमें 10 सेक्टर चुन गए और 58 पैरामीटर रखे गए. केन्द्र न इस मॉडल को अपनाया और दूसरे राज्यों में ऐसा मॉडल विकसित किया जा रहा है. राज्य ने गुड गवर्नेंस इंडेक्स में कुल 3.7% प्वाइंट्स की बढ़ोत्त्तरी दिखायी है.

सबसे ज्यादा बेहतरी वाणिज्य और उद्योग क्षेत्र में हुई है. साथ ही कृषि क्षेत्र, न्यायिक और जन सुरक्षा के साथ जनता से जुड़े बुनियादी ढांचों के क्षेत्रों में खासा परिवर्तन आया है. वित्तिय कार्यों में तकनीकि, पारदर्शिता और जवाबदेही ने क्रांति ला दी है. निर्माण कार्य में लागत कमती जा रही है और काम भी तेजी और समयबद्ध तरीके से पूरा हो रहा है. राज्य में कोई भी काम अब बिना ई टेंडरिंग या प्रशासनिक स्वीकृति के नहीं हो रहा है. यानि भ्र्ष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस राज्य को विकास की राह पर तेजी से ले जा रहा है.

डिजिटल गवर्नेंस कर रहा है समाज में कायाकल्प
राज्य सरकार ने कम से कम 450 सेवाओं को डिजिटल गवर्नेंस के तहत ला दिया है. इसके साथ ही सरकार की फीडबैक मशीनरी भी काम कर रही है. ऑनलाइन डोमिसाइल सर्टिफिकेट लेना हो या फिर जिला उद्योग केन्द्रों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट या ऑनलाईन पानी का बिल भरना हो और साथ ही ई रजिस्ट्रेशन ने लोगों का कतार में खड़े होना और लंबा इंतजार करना समाप्त कर दिया है.

राज्य को विशेष दर्जा हासिल होने से कई पुराने और भेदभाव बढ़ाने वाले कानूनों को निरस्त कर दिया गया है. अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया. लगभग 890 केंद्रीय कानूनों को लागू किया गया और 205 राज्य के कानून निरस्त हुए. अब कश्मीर की महिलाओं को गैर कश्मीरी से ब्याह करने की आजादी है बिना अपनी सन्तान के सम्पत्ति के अधिकार को खतरे में डाले. कश्मीर में डोमिसाइल लॉ लागू कर दिया गया है. वाल्मीकि, दलित, गोरखा समुदाय को बराबरी का अधिकार दे दिया गया है.

स्थानीय निकाय के स्तर पर भी 3 टायर पंचायती राज की व्यवस्था शुरू हो चुकी है और लोग अपना प्रतिनिधि चुन रहे हैं. 35000 पंचायत स्तर के चुने हुए प्रतिनिधि नए नेतृत्व के उभरने की कहानी कह रहे हैं. अक्टूबर 2019 में राज्य में पहली बार ब्लॉक विकास परिषदों BDC के चुनाव हुए. इसमें ऐतिहासिक 98,3% वोटर वोट देने आए. यानी कश्मीर में ग्रास रूट लोकतंत्र स्थापित हो चुका है.

370 हटने के बाद ऐसा पहली बार हुआ
शारदा मंदिर में दिवाली बरसों बाद मनाई गई. इससे साल 34 वर्षों के बाद श्रीनगर की सड़कों पर मुहर्रम का जुलूस निकला. 30 सालों के बाद श्रीनगर और कुछ जिलों में सिनेमा घर फिर से खुले. कश्मीरी पंडितों ने 32 साल के बाद अपनी गृह भूमि पर अपना त्योहार मनाया है. यही नहीं एल जी मनोज सिन्हा की पहल पर नई उद्योग नीति, न्यु फिल्म नीति, हाउस बोट नीति शुरू की गई है. श्रीनगर की जी 20 बैठक दुनिया भार में शांति का संदेश देने में सफल हुई. 2021 में श्रीनगर से शारजाह की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट शुरू हुई. 2022 में रिकार्ड संख्या में 1:88 करोड़ पर्यटक कश्मीर पहुंचे थे. वहां ऐसा किसी ने सोचा तक नहीं था.

युवाओं के लिए मौके और उच्च शिक्षा
मोदी सरकार ने तभी तो कश्मीर कर अब तक का सबसे बड़ा भर्ती अभियान चलाया और वहां के युवाओं को नौकरियां दी. लगभग 30000 लोगों को नौकरियां मिलीं और हिमायत योजना के तहत 12000 लोगों को नौकरियां दीं. जम्मू और श्रीनगर में एम्स बन रहे हैं तो जम्मू में आईआईटी औऱ आईआईएम शुरू किया जा चुका है. सरकारी डिग्री कॉलेज और इंजीनियरिंग कॉलेज की संख्या 96 से 147 हो चुकी है. 7 नए मेडिकल कॉलेज, 2 राज्य केंसर संस्थान, 15 नर्सिंग कॉलेज शुरू किए गए हैं. खेलो इंडिया शीत कालीन खेल गुलमर्ग में आयोजित हुए. राज्य की हर पंचायत में खेल की सुविधा दी गई है.

बदलते कश्मीर की अनकही कहानियां
धारा 370 हटने के बाद सरकार ने सबका विकास की ऐसी लहर चलायी है कि ना सिर्फ शांति के नया दौर आया है बल्कि समाज के हर तबके को छुआ है. अफ़शान हकीम जो कभी पत्थर बाजों की पोस्टर गर्ल हुआ करती थी आज जम्मू कश्मीर की फुटबॉल टीम की कप्तान है. पीएम मोदी ने अपनी मन की बात में लकड़ी से पेंसिल बनाने वाले मंजूर अहमद से बात कर उसका हौसला बढ़ाया था. एक स्कूल की लड़की सीरत नाज ने पीएम मोदी को संदेश भेजा था अपने स्कूल की इमारत ठीक करने के लिए और पीएम ने उसकी इच्छा पूरी की. ट्राल गांव की 2 युवा ल़डकियों ने मशरूम उगाना शुरू किया तो एक कश्मीरी लकड़ी हीना परे ने ट्राट फिश की फार्मिंग शुरू की. ये छोटी छोटी कहानियां काफी हैं बदलते कश्मीर का इतिहास बदलने के लिए.

आतंकवाद और उसके समर्थकों के साथ कड़ाई
कश्मीर में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हो रही हैं. इस बदलाव में आतंक और समर्थकों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है. 2018 में कश्मीर घाटी में 417 घटनायें हुईं, लेकिन धारा 370 हटने के बाद 2021 में आतंक की घटनायें सिर्फ 26 रह गईं थीं. पत्थरबाजी की घटनायें 2018 में 1767 थीं जो 2023 में शून्य हो गयी. बंद और हड़ताल 2018 के 52 के मुकाबले शून्य हो गए हैं. सीमा पार से घुसपैठ 2023 में शून्य है तो आतंकी 2018 के 199 के मुकाबले अब सिर्फ 12 लोग भर्ती कर पा रहे हैं.

ये केंद्र और राज्य सरकारों की रणनीति के ही नतीजा है कि अब आतंकियों और अलगाववादियों का समर्थन नहीं के बराबर रह गया है. 2018 में 58, 2019 में 70 और 2020 में 6 हुर्रियत नेताओं को गिरफ्तार किया गया था. उन्हें सरकारी खर्च पर मिली सुरक्षा वापस ले ली गई. करीब 82 बैंक खाते सीज किए जा चुके हैं. उधर आतंकियों से सम्बंध रखने के लिए 52 से अधिक सरकारी कर्मचारियों को नौकरियों से बर्खास्त किया जा चुका है.

विकास की राह पर कश्मीर को डालने वाले, धारा 370 हटने के बाद कश्मीर के पहले एल जी बनने वाले मनोज सिन्हा आम आदमी के गवर्नर हैं. मनोज सिन्हा कहते हैं कि विकास को जन आंदोलन बनाना ही उनका लक्ष्य है. तभी तो उन्होंने पुराने सिस्टम को बदल कर एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त शासन दिया है. जिससे कश्मीर बदल रहा है.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: Article 35A, Article 370, Jammu kashmir news, Narendra modi

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