Thursday, May 23, 2024
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Are radio collars to blame for the cheetah deaths at Kuno- क्या कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत के लिए रेडियो कॉलर जिम्मेदार? सरकार को GPS ट्रैकर हटाने की सलाह – News18 हिंदी

नई दिल्ली. महज चार महीनों में 8 चीतों की मौत के बाद यह आशंका जताई जा है कि ‘रेडियो कॉलर’ उनकी मौत का संभावित कारण हो सकता है. सरकार ने रेडियो कॉलर जैसे कारण को चीतों की मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली रिपोर्टों का खंडन किया है. मगर ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट में वन्यजीव अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क (KNP) में खुले में रहने वाले 10 चीतों से रेडियो कॉलर हटाने का सुझाव दिया गया है. अधिकारियों ने कहा कि चीतों के रेडियो कॉलर हटाने में कितना समय लगेगा, इसे बताना संभव नहीं है.

मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जे.एस चौहान ने कहा कि मानसून में रेडियो कॉलर की वजह से बैक्टीरिया का संक्रमण फैल सकता है. उन्होंने कहा कि ‘चीतों की मौत का एक कारण यह भी हो सकता है.’ हालांकि उन्होंने कहा कि इन मौतों का कारण पता लगाने के लिए एक जांच की जरूरत है. चीता टास्क फोर्स के अध्यक्ष ने पिछले हफ्ते कहा था कि 14 जुलाई को मध्य प्रदेश में मरे पाए गए तीन साल की उम्र के चीते सूरज की रेडियो कॉलर से त्वचा फटने के कारण हुए सेप्टीसीमिया से मौत हो गई थी. सूरज को इस साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से केएनपी में लाया गया था.

चीतों में सेप्टीसीमिया बहुत दुर्लभ
सेप्टिसीमिया बैक्टीरिया से खून में जहर फैलने से होता है, जो मौजूदा बारिश में चीतों की गर्दन के पहने जाने वाले रेडियो कॉलर का नतीजा हो सकता है. चीता परियोजना संचालन समिति के प्रमुख राजेश गोपाल ने भी कहा कि चीतों की मौत का कारण रेडियो कॉलर के इस्तेमाल से होने वाला सेप्टीसीमिया हो सकता है. उन्होंने कहा कि उमस भरे मौसम जैसे हालातों के कारण रेडियो कॉलर के इस्तेमाल से संक्रमण हो सकता है. उन्होंने कहा कि रेडियो कॉलर के कारण चमड़ी में घाव हो गया. जिसके कारण सूरज पर कीड़ों ने हमला कर दिया. गीले और उमस भरे मौसम के कारण उसकी स्थिति बिगड़ गई. जिससे उसके शरीर में बहुत संक्रमण फैल गया और सेप्टीसीमिया हो गया. जो चीतों में दुर्लभ से भी दुर्लभ मामला है.

वैज्ञानिक सबूत के बिना अफवाह
बहरहाल पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 20 वयस्क चीतों में से 5 की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई. इसमें कहा गया है कि रेडियो कॉलर जैसे कारकों को मौतों के लिए जिम्मेदार ठहराने वाली मीडिया रिपोर्टें ‘वैज्ञानिक सबूत के बिना अटकलों और अफवाहों’ पर आधारित थीं. मंत्रालय ने कहा कि चीतों की मौत के कारणों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय चीता विशेषज्ञों और दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के पशु चिकित्सकों के साथ सलाह-मशविरा किया जा रहा है.

रेडियो कॉलर से मौतें कितनी आम
2020 में वन्यजीव विशेषज्ञों ने गुजरात में एक साल में 4 एशियाई शेरों में से एक की मौत के लिए रेडियो कॉलर को जिम्मेदार ठहराया. ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन 89 शेरों को रेडियो कॉलर लगाए गए थे, उनमें से 19 की एक साल में मौत हो गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें वे 14 शेर शामिल हैं, जिन्हें जुलाई 2019 में ट्रैकिंग डिवाइस लगाया गया था.

Tags: Asiatic Cheetah, Madhya pradesh news, National Park

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