Thursday, May 23, 2024
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Chandrayaan-3: चंद्रयान-3 में भरा गया कौन सा और कितना ईंधन, क्या आई कुल लागत? जानें सबकुछ

नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का महत्वाकांक्षी तीसरा मून मिशन चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) का लैंडर मॉड्यूल (एलएम) बुधवार शाम को चंद्रमा की सतह को छूने को तैयार है. इस लैंडर मॉड्यूल में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान शामिल हैं, जो बुधवार को शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर चांद के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के पास उतरने वाला है.

इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश और अब तक अनछुआ रहे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन जाएगा. इसे लेकर हर भारतीय सहित दुनिया भर के लोग और अंतरिक्ष विज्ञानी बेहद उत्साहित हैं. लोग इसमें इस्तेमाल इंधन से लेकर इसकी लागत तक हर जानकारी तलाश रहे हैं. तो आइए हम ऐसे ही कुछ सवालों का जवाब यहां दे रहे हैं.

चंद्रयान-3 में कौन सा ईंधन हुआ इस्तेमाल?
चंद्रयान-3 मिशन 14 जुलाई को शुरू हुआ था और आज तक इसने 41 दिन का सफर तय कर लिया है. 3897.89 किलोग्राम वजनी इस अंतरिक्ष यान को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष स्टेशन से सबसे बड़ा और भारी लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM-3) के जरिये प्रक्षेपित किया गया था. इस रॉकेट को इसकी भारी-लिफ्ट क्षमता के चलते इसरो वैज्ञानिकों ने ‘फैट बॉय’ का नाम दिया है.

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इस रॉकेट को चार हिस्सों में विभाजित किया गया है, जिसका पहला चरण ठोस ईंधन द्वारा संचालित होता है, वहीं दूसरा चरण तरल ईंधन द्वारा संचालित होता है और तीसरे तथा अंतिम चरण में लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन द्वारा संचालित क्रायोजेनिक इंजन होता है.

चंद्रयान में कितना ईंधन भरा गया और कितना बचा है?
14 जुलाई को प्रक्षेपण के समय प्रोपल्शन मॉड्यूल में 1,696.4 किलोग्राम ईंधन भरा गया था. वहीं 23 अगस्त को इसरो द्वारा विक्रम (लैंडर) को सॉफ्ट-लैंड करने का प्रयास करने से पहले तक इसमें 150 किलोग्राम से अधिक ईंधन बचा हुआ है. इस कारण शुरुआत में जहां इस लैंडर के 3 से 6 महीने तक चलने की उम्मीद थी, वहीं अब माना जा रहा है कि यह कई वर्षों तक सुचारू रूप से काम करता रह सकता है.

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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ के हवाले से बताया, ‘इसमें बहुत ज्यादा ईंधन बचा है, जो हमारी उम्मीदों से कहीं अधिक है. चंद्रमा के रास्ते में सब कुछ अच्छी तरह हुआ और सुधार की जरूरत वाली कोई आकस्मिकता नहीं थी (जिसके लिए ईंधन खर्च किया गया होता). ऐसे में हमारे पास लगभग पूरा मार्जिन बचा हुआ है, जो कि लगभग 150+किग्रा है.’

चंद्रयान-3 मिशन का कुल बजट
वहीं इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में इसरो के हवाले से बताया गया है कि, चंद्रयान -3 को लगभग 615 करोड़ रुपये या 75 मिलियन डॉलर के बजट पर बनाया गया है. इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. सिवन ने पहले कहा था कि चंद्र मिशन के लिए लैंडर रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल की लागत लगभग 250 करोड़ रुपये होगी, जबकि लॉन्च सेवा की लागत लगभग 365 करोड़ रुपये होगी.

बता दें कि चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 की अगली कड़ी है और इसका उद्देश्य चांद की सतह पर सुरक्षित और आसानी से लैंडिंग करना, चंद्रमा पर घूमना और वैज्ञानिक प्रयोग करना है. चंद्रयान -2 अपने अभियान में विफल रहा था, क्योंकि इसका लैंडर ‘विक्रम’ सात सितंबर, 2019 को लैंडिंग का प्रयास करते समय लैंडर के ब्रेकिंग सिस्टम में खराबी आ जाने के कारण सतह पर उतरने से कुछ मिनट पहले चंद्रमा की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. चंद्रयान का पहला अभियान 2008 में हुआ था.

Tags: Chandrayaan-3, ISRO, Mission Moon

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