Thursday, February 22, 2024
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Chandrayaan 3: लॉन्चिंग से लेकर चांद पर लैंडिंग तक… चंद्रयान-3 मिशन में AI ने इसरो की खूब की मदद

नई दिल्ली. चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 की सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद से दुनियाभर के अंतरिक्ष विज्ञानी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की खूब तारीफ कर रहे हैं. इस मून मिशन की सफलता के साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का पहला देश और चांद की सतह पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है. इसरो के इस बेहद महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में  योजना और नेविगेशन से लेकर डेटा विश्लेषण और संचार तक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने खासी अहम भूमिका निभाई है.

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने हाल ही में एक अभूतपूर्व तकनीकी प्रगति का खुलासा किया है, जिसमें मून मिशन में क्रांति लाने की क्षमता है और एआई ने इस मिशन में इसरो की कैसे मदद की. इस तकनीकी प्रगति में एक परिष्कृत सेंसर शामिल है, जिसमें वेलोसिमेट्री और अल्टीमीटर शामिल हैं. ये सटीक उपकरण चांद पर लैंडिंग के समय लैंडर की गति और ऊंचाई से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र करने में अहम भूमिका निभाते हैं.

यहां हम चंद्रयान-3 के सफर के ऐसे ही कुछ पहलू का जिक्र कर रहे हैं, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने बेहद अहम भूमिका निभाई है.

एआई एल्गोरिदम ने चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान को स्वायत्त रूप से नेविगेट करने और चंद्रमा की सतह पर बाधाओं से बचने में मदद की. यह सुरक्षित रूप से लैंडिंग और कुशलतापूर्वक विचरण के लिए महत्वपूर्ण है.

एआई-संचालित प्रज्ञान रोवर ने अभी से इस चांद की सतह पर डेटा एकत्र करना शुरू कर दिया है. यह चंद्रमा पर मौजूद वातावरण के अनुकूल बनने, दिलचस्प भूवैज्ञानिक विशेषताओं की पहचान करने और कहां अन्वेषण करना है, इस पर निर्णय लेने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करता है.

एआई इस अंतरिक्ष यान प्रणालियों से डेटा का विश्लेषण करके यह अनुमान लगा सकता है कि कब इसके कल-पुर्जों के फेल होने की आशंका है. इससे वक्त रहते मशीनों के रखरखाव में मदद मिलती है और मिशन की विफलता के जोखिम को कम किया जा सकता है.

एआई एक मिशन के दौरान विशाल मात्रा में एकत्र किए गए डेटा को संसाधित और विश्लेषण करता है. इसमें वैज्ञानिक खोज करने के लिए फोटोज़, स्पेक्ट्रोस्कोपिक डेटा और भूवैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण करना शामिल है.

एआई अंतरिक्ष में मौसम की स्थिति, जैसे सौर ज्वाला या रेडियेशन तूफान, की भविष्यवाणी करने में मदद कर सकता है, जो लैंडर की सुरक्षा और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है.

एआई ने डेटा ट्रांसमिशन और भंडारण दक्षता में सुधार किया है, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि बेशकीमती वैज्ञानिक डेटा सुरक्षित तरीके से समय पर पृथ्वी तक पहुंच सके.

एआई ने समय के साथ चंद्रमा के पर्यावरण में होने वाले बदलावों, जैसे तापमान में उतार-चढ़ाव, भूकंपीय गतिविधि या पानी में बर्फ की उपस्थिति की निगरानी करने में भी मदद की है.

Tags: Artificial Intelligence, Chandrayaan-3, ISRO, Mission Moon

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