Thursday, February 29, 2024
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चंद्रयान-3 की सफलता और लूना-25 की नाकामी भारत को करेगी मालामाल, अब इसरो की ओर देखेगी दुनिया

Chandrayaan-3: भारत के मिशन मून चंद्रयान-3 ने चांद के अब तक अनछुए रहे दक्षिणी हिस्‍से में सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग कर इतिहास रच दिया है. इस सफलता के साथ ही भारत चांद के इस हिस्‍से में लैंड करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है. इस सफलता ने विज्ञान, राष्‍ट्रीय प्रतिष्‍ठा को बढ़ाने के साथ ही भारत के लिए मालामाल होने के नए दरवाजे भी खोल दिए हैं. वहीं, भारत के साथ मिशन मून में प्रतिस्‍पर्धा कर रहा रूस का लूना-25 दुर्घटनाग्रत हो गया. दुनियाभर के विश्‍लेषकों और विशेषज्ञों को उम्‍मीद है कि लूना-25 की नाकामी और चंद्रयान-3 की सफलता से भारत के तेजी से उभरते अंतरिक्ष कारोबार को बहुत बढ़ावा मिलेगा.

भारत और रूस के बीच चंद्रमा के अज्ञात क्षेत्र में पहले पहुंचने की अचानक शुरू हुई होड़ ने 1960 के दशक की स्‍पेस रेस की यादें ताजी कर दी थीं. उस समय संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ में स्‍पेस में आगे निकलने की होड़ चली थी. हालांकि, अब अंतरिक्ष एक कारोबार में तब्‍दील हो चुका है. अंतरिक्ष कारोबर के मामले में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग एक पुरस्कार है. दरअसल, चांद के इस क्षेत्र में ही पानी की बर्फ है. योजनाकारों को उम्मीद है कि इससे भविष्य में चांद पर कॉलोनी, खनन और मंगल मिशन को फायदा मिल सकता है.

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अंतरिक्ष प्रक्षेपणों का किया निजीकरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रोत्‍साहन के चलते भारत ने अंतरिक्ष प्रक्षेपणों का निजीकरण कर दिया है. अब भारत इस क्षेत्र को विदेशी निवेश के लिए खोलना चाहता है. भारत का लक्ष्य अगले दशक के भीतर वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में अपनी हिस्सेदारी में पांच गुना बढ़ोतरी करना है. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अपनी लागत प्रतिस्पर्धी इंजीनियरिंग का फायदा उठाएगा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो के पास मिशन के लिए करीब 7.4 करोड़ डॉलर का बजट था. वहीं, नासा 2025 तक अपने आर्टेमिस मून प्रोग्राम पर करीब 93 अरब डॉलर खर्च करने की राह पर है.

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भारत का लक्ष्य अगले दशक के भीतर वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में अपनी हिस्सेदारी में पांच गुना बढ़ोतरी करना है.

इसरो की ओर उम्‍मीद से देखेगी दुनिया
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही इसरो का चंद्रयान सफल हुआ, इससे जुड़े सभी लोगों का प्रोफाइल ऊंचा हो गया है. अब जब दुनिया ऐसे मिशन की योजना बनाएगी, तो वे इसरो की ओर मदद के लिए देखेंगे. यूक्रेन में युद्ध और बढ़ते अलगाव पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद भी रूस लून मिशन को लॉन्‍च करने में कामयाब रहा. हालांकि, कुछ विशेषज्ञों को लूना-25 के उत्तराधिकारी को वित्तपोषित करने की रूस की क्षमता पर संदेह था. रूस ने भी यह नहीं बताया है कि उसने लूना-25 पर कितना खर्च किया. मॉस्को के एक स्वतंत्र अंतरिक्ष विशेषज्ञ और लेखक वादिम लुकाशेविच ने कहा था कि अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए खर्च साल-दर-साल कम हो जाता है. उन्होंने कहा कि रूस के बजट में यूक्रेन से युद्ध को प्राथमिकता देने के कारण लूना-25 के बाद अगले लूनर मिशन की उम्‍मीद कम ही है.

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रूस ने बदली योजना, भारत अमेरिका की राह पर 
रूस 2021 तक नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम में अपनी भूमिका पर विचार कर रहा था. इसके बाद रूस ने कहा कि वह चीन के लूनर मिशन में भागीदार होगा. तब कहा गया कि चीन ने 2019 में चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर पहली बार सॉफ्ट लैंडिंग की. इसके बाद अब ज्‍यादा मून मिशन की योजना बना रहा है. अंतरिक्ष अनुसंधान फर्म यूरोकंसल्ट का अनुमान है कि चीन 2022 में अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम पर 12 अरब डॉलर खर्च करेगा. हालांकि, रूस के कुछ अधिकारियों ने कहा कि नासा ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश को खोल दिया है. अब भारत भी इसी राह पर चल रहा है.

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नासा ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश को खोल दिया है. अब भारत भी इसी राह पर चल रहा है.

निजी कंपनी कर रही नासा की मदद
अमेरिका के अरबपति उद्योगपति एलन मस्क का स्पेसएक्स अपने उपग्रह प्रक्षेपण व्यवसाय के साथ 3 अरब डॉलर के अनुबंध के तहत नासा के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह तक पहुंचाने के लिए स्टारशिप रॉकेट विकसित कर रहा है. मस्क ने कहा कि उस अनुबंध से इतर स्पेसएक्स इस साल स्टारशिप पर करीब 2 अरब डॉलर खर्च करेगा. अमेरिकी अंतरिक्ष फर्म एस्ट्रोबोटिक एंड इंट्यूएटिव मशींस मून लैंडर का निर्माण कर रही है, जिनके साल के अंत तक या 2024 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लॉन्च होने की उम्मीद है. एक्सिओम स्पेस और ब्लू ओरिजिन जैसी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए निजी तौर पर वित्त पोषित उत्तराधिकारी तैयार कर रही हैं. एक्सिओम ने सऊदी और दक्षिण कोरियाई निवेशकों से 350 मिलियन डॉलर जुटाए.

Tags: Chandrayaan-3, Elon Musk, International Space Station, ISRO, ISRO satellite launch, Nasa, Space Exploration

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