Sunday, July 14, 2024
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आ रही है बड़ी बीमारी ‘X’! चोरों की तरह करेगी घुसपैठ, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, हो जाएं सावधान, नहीं तो…

हाइलाइट्स

कोविड-19 की तरह ही नई बीमारी को लेकर हड़कंप मच गया है.
इसे लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी दी है.
आम जनता का मानना ​​है कि यह एक नई बीमारी है.

नई दिल्ली: दुनिया में एक नई बीमारी को लेकर हड़कंप मच गया है. दरअसल इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नई बीमारी को लेकर काफी चर्चा हो रही है. शीर्ष वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने सोशल मीडिया पर बीमारी के बारे में रिपोर्टों के व्यापक प्रसार के बाद स्पष्ट किया है कि यह एक काल्पनिक बीमारी है. जिसे वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने ‘X’ नाम दिया है. आम जनता में कई लोगों का मानना ​​है कि यह एक नई बीमारी है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा नई महामारी को ‘डिजीज X’ करार दिया गया है. हालांकि इसने आम जनता को गलती से इसे कोविड-19 के बाद की एक नई बीमारी के रूप में समझने का कारण बना दिया. अशोका यूनिवर्सिटी के डीन, बायोसाइंसेज एंड हेल्थ रिसर्च डॉ. अनुराग अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि डिजीज एक्स एक नए रोगजनक का ‘एक काल्पनिक रोग’ है जो एक नई महामारी का कारण बनता है जो पिछले वाले की तुलना में अधिक गंभीर है.

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नए शब्द की व्याख्या करते हुए डॉ. एनके अरोड़ा ने डिजीज X और एक घुसपैठिए या चोर के बीच तुलना की. उन्होंने कहा कि यह किसी के घर में एक चोर की तरह घुसपैठ करता है. वैक्सीनेशन पर नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी (NTAGI) के प्रमुख एनके अरोड़ा ने कहा, ‘वह चोर कभी भी आपके घर में प्रवेश नहीं कर सकता है, लेकिन तैयारी में, आप CCTV कैमरे लगाएं, घर पर ताला लगाएं, एक कुत्ता खरीदें और हथियार तैयार रखें. डिजीज एक्स उस काल्पनिक चोर के समान है जो शायद हमारे जीवनकाल में न आए, लेकिन अभी से तैयारी की जरूरत है. वैज्ञानिकों का समुदाय उस संभावित घुसपैठिए की कल्पना करते हुए तैयार हो रहा है.’

विशेषज्ञों की चेतावनी

वहीं, ब्रिटेन स्थित एक विशेषज्ञ का चेतावनी भरा बयान लोगों के बीच चिंता पैदा करने वाला है. यूके के वैक्सीन टास्कफोर्स की अध्यक्षता करने वाली डेम केट बिंघम ने कहा, ‘अगली महामारी 50 मिलियन लोगों की जान ले सकती है.’ उन्होंने कहा कि यह पहले से ही अपने महामारी बनने के रास्ते पर हो सकता है. बिंघम ने कहा कि डिजीज एक्स ‘कोरोना वायरस से 20 गुना अधिक घातक’ हो सकता है.

डेली मेल से बात करते हुए, उन्होंने कहा, ‘दुनिया को बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान के लिए तैयार रहना होगा और रिकॉर्ड समय में खुराक देनी होगी… कल्पना कीजिए कि रोग एक्स, इबोला की मृत्यु दर (67 प्रतिशत) के साथ खसरे जितना ही संक्रामक है. दुनिया में कहीं न कहीं इसकी नकल हो रही है और देर-सबेर कोई न कोई बीमार महसूस करने लगेगा.’

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देश के विशेषज्ञों ने क्या कहा
देश के शीर्ष महामारी विशेषज्ञ डॉ. रमन गंगाखेड़कर ने News18 को बताया कि डिजीज एक्स से संबंधित घबराहट या तनाव को कम करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि काल्पनिक रोगजनकों के बारे में जागरूक होने की जरूरत पहले से कहीं अधिक है. उन्होंने आगे कहा, ‘जलवायु परिवर्तन के कारण’ जूनोटिक रोगों से फैलने का खतरा नाटकीय रूप से बढ़ रहा है. इससे जंगल भी प्रभावित हो रहे हैं जिससे जानवरों से मनुष्यों में संक्रमण बढ़ेगा.

उन्होंने आगे बताया कि चमगादड़ों को लगभग 40 वायरस के भंडार के रूप में जाना जाता है, जिनमें से अब तक केवल छह ही ज्ञात हैं, जिनमें कोरोना वायरस भी शामिल है. बता दें कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के पूर्व प्रमुख गंगाखेड़कर ने केरल में निपाह वायरस और कोविड-19 के प्रकोप से निपटने में देश के प्रयासों का नेतृत्व किया है.

उन्होंने सलाह दी है कि भारत को ‘वन हेल्थ’ मिशन के लिए अपनी तैयारी तेज करनी चाहिए जिसके तहत जानवरों की निगरानी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. उन्होंने अपने जमीनी कार्यों और सीखों के उदाहरण साझा करते हुए कहा, ‘हमें सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत करने की जरूरत है.’

भारत की यह है तैयारी
कर्नाटक की कोविड-19 टास्क फोर्स की जीनोमिक निगरानी समिति के सदस्य डॉ. विशाल राव ने एक विस्तृत रोडमैप शेयर किया कि भारत रोग एक्स के खिलाफ कैसे तैयारी कर रहा है. उन्होंने कहा, ‘एम-पाथ कार्यक्रम के तहत बेंगलुरु बायोइनोवेशन सेंटर, बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट कर्नाटक सरकार और राज्य स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) की टीम ने 32 संभावित रोगजनकों की पहचान की है.’

आ रही है बड़ी बीमारी 'X'! चोरों की तरह करेगी घुसपैठ, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, हो जाएं सावधान, नहीं तो...

जिला स्तर पर इन रोगजनकों की निगरानी करने और निगरानी बढ़ाने के लिए, टीम शहरी विकास, ग्रामीण और पंचायती राज और अन्य एजेंसियों सहित विभिन्न राज्य विभागों के साथ सहयोग करेगी. उन्होंने कहा,  ‘टीम एम-पाथ्स नामक एक मल्टीप्लेक्स सीरोलॉजी प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जिसे भारत के लिए विशिष्ट मानव रोगजनकों के खिलाफ एंटीबॉडी की पहचान करने के लिए डिजाइन किया गया है. टीम एम-पाथ्स नामक एक मल्टीप्लेक्स सीरोलॉजी प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जिसे भारत के लिए विशिष्ट मानव रोगजनकों के खिलाफ एंटीबॉडी की पहचान करने के लिए डिजाइन किया गया है.’

Tags: Covid, COVID 19, Health News

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