Thursday, February 29, 2024
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Elections 2024: न तो NDA और न INDIA गठजोड़ में ये पार्टियां, कर सकती हैं ‘खेला’!

हाइलाइट्स

बीएसपी और बीआरएस अकेले दम पर चुनाव में उतरने का कर चुके ऐलान
अकाली दल,टीडीपी और जेडी-एस जैसे दल अभी परख रहे सियासी माहौल

देश में अगले वर्ष होने वाले आम चुनाव (General Elections 2024) संघर्षपूर्ण होने की संभावना है.बीजेपी नीत NDA को कड़ी चुनौती देने के लिए कांग्रेस नीत INDIA गठबंधन अपनी ताकत बढ़ाने और रणनीति बनाने में जुटा है. जेडीयू, शिवसेना (उद्धव गुट) और अकाली दल के ‘छिटकने’ के बावजूद NDA गठबंधन में इस समय 36 पार्टियां हैं, हालांकि इसमें छोटी पार्टियों की संख्‍या ज्‍यादा है. दूसरी ओर, पिछले माह बेंगलुरू में कांग्रेस की ओर से बुलाई गई विपक्ष की बैठक में 26 दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे.इस बैठक में ही गठबंधन को INDIA (इंडियन नेशनल डेवेलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस) नाम दिया गया था.दोनों ही गठबंधन उम्‍मीद लगाए है कि आम चुनाव की तिथि नजदीक आने के साथ कुछ और दल उनके साथ जुड़ेंगे.

दरअसल, NDA और INDIA गठबंधन से इतर कुछ पार्टियां ऐसी भी हैं जिन्‍होंने अभी ‘एकला चलो’ की नीति अपना रखी हैं.इनमें से कई का कहना है कि ये किसी गठबंधन में शामिल नहीं होंगी और अकेले लोकसभा चुनाव में उतरेंगी.इन पार्टियों में मायावती (Mayawati)की बीएसपी और के. चंद्रशेखर राव (KCR) की बीआरएस शामिल हैं.केसीआर और मायावती तो लोकसभा चुनाव में अकेले उतारने का ऐलान भी कर चुके हैं.

यूपी के अलावा मध्‍य प्रदेश, राजस्‍थान और पंजाब में जनाधार रखने वाली बीएसपी सुप्रीमो मायावती की ओर से जारी बयान में कहा गया है,’गठबंधन के कारण लाभ की बजाय पार्टी को नुकसान ज्यादा उठाना पड़ा है.बीएसपी का वोट तो स्पष्ट तौर पर गठबंधन वाली दूसरी पार्टी को ट्रांसफर हो जाते हैं, लेकिन दूसरी पार्टियां अपना वोट बीएसपी उम्मीदवारों को ट्रांसफर कराने की न सही नीयत रखती हैं और न ही क्षमता.इसलिए उनकी पार्टी दोनों गठबंधनों से दूर रहेगी.’बीएसपी और बीआरएस के अलावा दोनों गठबंधन से दूरी बनाए दूसरी पार्टियां फिलहाल चुनावी माहौल का जायजा लेने में व्‍यस्‍त हैं और समय आने पर नफा-नकुसान को ध्‍यान में रखकर फैसला ले सकती हैं.

दल जो फिलहाल ‘इंडिया’ और ‘एनडीए’ गठबंधन से दूर हैं

बहुजन समाज पार्टी: हाल के वर्षों में भले ही बीएसपी की ताकत कम हुई है लेकिन यूपी सहित हिंदी बहुल राज्‍यों में अभी भी इसके समर्थकों की संख्‍या अच्‍छी खासी है.पार्टी ने पिछला लोकसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था और 10 सीटें जीतने में सफल रही थी.दो अलग-अलग धुरी वाली इन दोनों पार्टियों का गठबंधन जल्‍द ही टूट गया.2022 के विधानसभा में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी को भारी पड़ा था और वह केवल एक सीट पर जीत सकी थी.मायावती के सामने अब राज्‍य में अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाने की चुनौती है.

संभावना क्‍या : यूपी में वोट अब एकमुश्‍त रूप से बीजेपी और एसपी के पक्ष में जाते हैं.इसके बाद कांग्रेस और फिर बीएसपी का नंबर आता है.ऐसे में बीएसपी राज्‍य में एक भी सीट जीत पाई तो हैरानी ही होगी.हालांकि पार्टी अपने वोट प्रतिशत से दूसरे उम्‍मीदवारों का खेल बिगाड़ सकती है.अन्‍य राज्‍यों में भी बीएसपी की सीट जीतने की संभावना नहीं के बराबर है.

जनता दल सेक्‍युलर: पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडी-एस का जनाधार कर्नाटक तक सीमित है और अब यह भी छिटक रहा है.उम्रदराज हो चुके देवेगौड़ा की जगह पार्टी की कमान उनके बेटे एचडी कुमारस्‍वामी के हाथ में है.लोकसभा में एक ही सांसद है जबकि इसी वर्ष राज्‍य में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ 19 सीटें जीत पाई थी और वोट प्रतिशत भी गिरकर 13. 3 फीसदी पर आ गया था.संभावना क्‍या : एनडीए गठबंधन में शामिल हो सकती है लेकिन फिलहाल माहौल का जायजा ले रही है.अकेले दम पर लड़ी तो एक सीट भी जीतना कठिन होगा.

बीजू जनता दल: नवीन पटनायक की अगुवाई वाले बीजू जनता दल का ओडिशा में अच्‍छा जनाधार है.पुरजोर कोशिशों के बावजूद विधानसभा चुनाव में बीजेडी को हराना बीजेपी के लिए अब तक सपना ही रहा है.राज्‍य में लोकसभा की 21 सीटें थीं जिसमें से पार्टी ने 2019 के चुनावों में 12 जीती थीं. विधानसभा चुनाव में बीजेडी ने 112 सीटें जीती थी जबकि बीजेपी ने केवल 23.
संभावना : कुशल प्रशासक की छवि रखने वाले नवीन बाबू की पार्टी राज्‍य में दोहरी संख्‍या में लोकसभा सीटें जीत सकती है. संसद में अविश्‍वास प्रस्‍ताव सहित विभिन्‍न मुद्दों पर एनडीए के साथ खड़ी रही है.राज्‍य में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव भी हैं,ऐसे में एनडीए में शामिल नहीं होगी.

भारत राष्‍ट्र समिति यानी बीआरएस : के चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao)ने अपनी पार्टी को राष्‍ट्रीय स्‍वरूप देते हुए इसका नाम तेलंगाना राष्‍ट्र समिति (टीआरएस)से भारत राष्‍ट्र समिति (बीआरएस) किया है.2019 के लोकसभा चुनाव में राज्‍य की 17 में से 9 सीटों पर जीत हासिल की थी.यह संख्‍या कम हो सकती है.
संभावना : तेलंगाना में इसी वर्ष विधानसभा भी चुनाव होने है जिसमें केसीआर की पार्टी की परीक्षा होगी. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्‍य में करीब 20 फीसदी वोट हासिल किए थे.यह वोट प्रतिशत अब और बढ़ सकता है.वैसे भी 2018 के बाद बीजेपी ने इस तेलंगाना पर खास तौर पर ध्‍यान केंद्रित किया है,ऐसे में बीआरएस की सीटें घट सकती है.

शिरोमणि अकाली दल (बादल): शिरोमणि अकाली दल (बादल) दो दशक से अधिक समय तक एनडीए का सदस्‍य रहा है लेकिन वर्ष 2020 में किसान बिल के विरोध में पार्टी ने एनडीए और बीजेपी से रिश्‍ता तोड़ लिया था.2021 में शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने एक धड़े ने सुखदेव सिंह ढींडसा की अगुवाई में शिरोमणि अकाली दल (संयुक्‍त) बना लिया था. यह धड़ा, शिरोमणि अकाली दल (संयुक्‍त) एनडीए का हिस्‍सा है. पंजाब में जिस तरह से विधानसभा चुनाव आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस, बीजपी और अकाली दल को धूल चटाई है, उससे ध्‍यान में रख अकाली दल (बादल)एनडीए में वापसी कर सकता है. 2019 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में बीजेपी ने तीन और अकाली दल ने दो सीटों पर जीत हासिल की थी.
संभावना : अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ जैसे नेताओं के शामिल होने से राज्‍य में बीजेपी मजबूत हुई है.बीजेपी और अकाली दल अभी साथ आने से इनकार कर रहे हैं लेकिन सियासी मजबूरी ऐसा करा सकती है.

वायएसआर कांग्रेस पार्टी (वायएसआरसीपी): कांग्रेस के पूर्व नेता और आंध्र के पूर्व सीएम वाईएस राजशेखर रेड्डी के बेटे जगनमोहन (YS Jagan Mohan Reddy)की पार्टी इस समय राज्‍य में सत्‍ता में हैं.2019 के लोकसभा चुनाव में बंपर प्रदर्शन करते हुए इस पार्टी में राज्‍य में 25 में से 22 सीटें जीती थीं जबकि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगुदेशम पार्टी को तीन सीटें मिली थीं.ये दोनों पार्टियां इस समय एनडीए से बाहर हैं.
संभावना: नायडू की तेलुगुदेशम एनडीए का हिस्‍सा रहने के बाद 2018 में इससे अलग हो गई थी.वे फिर एनडीए में आना चाहते हैं. दूसरी ओर, वायएसआरसीपी ने भी राष्‍ट्रपति, उप राष्‍ट्रपति चुनाव के अलावा कई मौकों पर सरकार के पक्ष में वोट किया है.दक्षिण भारत के राज्‍य कर्नाटक में बीजेपी मजबूत है.तमिलनाडु में उसे एआईएडीएमके का साथ मिला है.आंध्र में वह मजबूत सहयोगी चाहती है जो अभी वायएसआरसीपी ही लग रही. आंध्र में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में देखना दिलचस्‍प होगा कि उससे पहले जगनमोहन की पार्टी एनडीए में शामिल होगी या बाहर से ही इसे समर्थन जारी रखेगी.

इन पार्टियों के अलावा असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम, असम की एआईयूडीएफ और ओमप्रकाश चौटाला की इंडियन नेशनल लोकदल भी एनडीए या इंडिया में से किसी गठबंधन का हिस्‍सा नहीं हैं, लोकसभा में एआईएमआईएम के इस समय दो और एआईयूडीएफ का एक सांसद है.

Tags: BSP, Chandrababu Naidu, HD kumaraswamy, India, Lok Sabha Election 2024, Mayawati

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