Friday, July 19, 2024
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Explainer : किस दिन पृथ्वी की कक्षा से निकल चांद के ऑरबिट में पहुंचेगा चंद्रयान, आगे क्या होगा

हाइलाइट्स

चंद्रयान-3 की गति हवाई जहाज की गति की 10 गुना ज्यादा बताई जा रही है
ये पृथ्वी की कक्षा में अपने अंडाकार पथ को बढ़ाते हुए एक वक्राकार पथ की ओर घूमेगा

क्या आपको मालूम है कि 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा से छोड़ा गया चंद्रयान – 3 कितने दिनों तक पहले पृथ्वी की कक्षा में रहेगा और फिर वहां से निकलकर चांद की कक्षा में पहुंचेगा. उससे पहले वह धरती और चांद के बीच एक ट्रांजिशन पथ पर भी गति करेगा. ये अपनी गति समय समय पर बदल रहा है . अभी इसकी गति तेज की जा रही है. जानते हैं इस पूरी प्रक्रिया के बारे में

सवाल – चंद्रयान – 3 कितने दिनों तक पृथ्वी की कक्षा में रहेगा और फिर यहां से निकलेगा?
– अनुमान के मुताबिक चंद्रयान पृथ्वी की कक्षा में 21 दिन चक्कर लगाता रहेगा.पृथ्वी के ऑरबिट में ये अपने अंडाकार रास्ते को और बड़ा करता रहेगा. इसे इसरो के वैज्ञानिक नीचे से कंट्रोल करके उसके घूमने वाले पथ को बढ़ाते रहेंगे जिससे घूमते घूमते ये अपने अंडाकार पथ को बड़ा करे और फिर वो स्थिति आ जाए कि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर निकल जाएगा.

सवाल – चंद्रयान-3 जब पृथ्वी की कक्षा से निकलेगा तो क्या सीधे चांद की कक्षा में पहुंच जाएगा?
– नहीं पृथ्वी की कक्षा से निकलने के बाद चांद और धरती के बीच एक थोड़े वक्राकार रास्ते पर चलेगा. एक तरह से ये पृथ्वी और चांद के बीच ये उसका ट्रांजिशन पथ होगा. जिसे ट्रांस लूनर इंजेक्शन कहा जाएगा. इसे इस पथ पर डालने का काम भी इसरो के वैज्ञानिक नीचे कंट्रोल रूम से ही करेंगे. ये कंट्रोल रूम बेंगलुरु में है.

40 दिनों के सफर में पृथ्वी से लेकर चांद तक कहां कहां से गुजरेगा चंद्रयान-3 और किस तरह रहेगा उसका रास्ता. (News18 Gfx)

सवाल – चंद्रयान-3 इस ट्रांजिशन पथ पर कितने दिन रहेगा, ये कितना लंबा होगा?
– शायद चंद्रयान इस ट्रांस लूनर इंजेक्शन पर एक ही दिन या इससे कम होगा, इसकी लंबाई आमतौर पर पृथ्वी पर उसके द्वारा लगाए गए आखिरी अंडाकार पथ के बराबर होगी. इस पथ के जरिए इसरो के वैज्ञानिक इसे चांद की कक्षा की ओर मोड़ देंगे बल्कि ये कह लीजिए कि चांद की कक्षा में प्रवेश करा देंगे.

सवाल – ये कब चांद की कक्षा में पहुंचेगा?
– इसरो के अनुमान के मुताबिक चंद्रयान-3 को 05 अगस्त को चांद की कक्षा में पहुंचना चाहिए. फिर ये करीब 18 दिनों तक उसकी कक्षा में घूमते हुए अपने पथ को कम करता जाएगा. 19वें दिन इसका पथ जब 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर रह जाएगा तब इसके चांद की सतह पर उतरने की प्रक्रिया शुरू होगी.

जब चंद्रयान-3 चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर होगा तो कई बदलाव इसी स्थिति में होंगे, जो इसरो के बेंगुलुरु सेंटर पर बैठे कंट्रोल रूम के साइंटिस्ट करेंगे. (News18 Gfx))

सवाल – चंद्रयान-3 जब पृथ्वी से छोड़ा गया था तब इसके साथ रॉकेट भी था. वो रॉकेट कहां गया?
– इस चंद्रयान-3 को एलवीएम-3 (LVM-3) रॉकेट से छोड़ा गया था. ये रॉकेट चंद्रयान को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के बाद अलग हो गया. ज्यादातर मिशन में अपना काम करने के बाद ये रॉकेट नष्ट हो जाता है.

सवाल – चांद पर चंद्रयान के उतरने की प्रक्रिया किस तरह शुरू होगी?
– जब चंद्रयान मून की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर होगा तब इसके साथ लगा प्रोपल्सन अलग हो जाएगा. अब चंद्रयान की गति धीमी होगी. अब तक प्रोपल्सन चंद्रयान को गति दे रहा था, जो इस समय 6000 किलोमीटर प्रति घंटा की होगी. अब चंद्रयान का इंजन खुद शुरू हो जाएगा. गति कम होने लगेगी.
इसी स्थिति में चंद्रयान में लगे होवर्स ऐसी जगह देखेंगे जहां यान बगैर किसी दिक्कत के उतर सके. अगर कहीं बाधा नजर आएगी तो यान वहां नहीं उतरेगा और नई जगह तलाशेगा. कुल मिलाकर इस बार ये स्थिति चंद्रयान-2 से एकदम अलग होगी.

जब चंद्रयान -3 चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहा होगा तो इसे गति दे रहा प्रोपल्सन भी इससे अलग हो जाएगा. तब बचेगा केवल चंद्रयान, जो धीरे धीरे फिर चांद की सतह पर आएगा. (News18 Gfx))

जब दूरी 30 किलीमीटर की रहेगी तो यान की स्पीड बहुत कम हो जाएगी. ये लगभग हवा में झूलता हुआ नीचे आने लगेगा. ये करीब 15 मिनट की स्थिति होगी, जिसको इस अभियान में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. फिर अगर उतरने में बाधा नहीं होगी तो चंद्रयान चांद की सतह पर नीचे उतर आएगा.

सवाल – चंद्रयान-3 किस दिन चंद्रमा की सतह पर उतरेगा?
– इसरो के वैज्ञानिकों का आंकलन है कि 21 दिन पृथ्वी के ऑरबिट और 19 दिन चांद की कक्षा में रहने के बाद 40वें दिन यानि 23 अगस्त को चंद्रयान-3 चांद की सतह पर उतर जाएगा.

सवाल – ये इस दौरान कितनी दूरी तय  करेगा?
–  40 दिनों के दौरान ये यान 3,84,000 किलोमीटर की दूरी तय करेगा. वैसे आपको बता दें कि पृथ्वी से चांद की दूरी करीब 35,000 किलोमीटर है लेकिन कक्षाओं में घूमते हुए जाने के कारण ये इतनी दूरी तय करेगा.

Tags: Chandrayaan-3, ISRO, Mission Moon, Moon

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