Thursday, May 23, 2024
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गडकरी ने रीजनल ऑफिसर और प्रोजेक्‍ट डायरेक्‍टर को सड़कों पर उतरने का दिया फरमान, वजह जान आप भी करेंगे तारीफ

नई दिल्‍ली. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री न‍ितिन गडकरी दो चीजों के लिए जाने जाते हैं, पहला एक्‍सप्रेसवे व हाईवे का निर्माण और दूसरा काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्‍त एक्‍शन लेने के लिए. हाल ही में उन्‍होंने रीजनल ऑफिसर (आरओ) और प्रोजेक्‍ड डायरेक्‍टर (पीडी) को सड़कों पर उतरने का फरमान दे दिया है. अब इन अधिकारियों को निरीक्षण करने के लिए फील्‍ड में जाना होगा. वजह जानकर आप भी नितिन गडकरी की तारीफ करेंगे.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री सड़क हादसों को रोकने के लिए लगातार प्रयासरत हैं. उन्‍होंने 2025 समाप्त होने से पहले सड़क दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करने लक्ष्‍य रखा है. दरअसल सड़क हादसों की एक वजह ब्‍लैक स्‍पॉट भी होते हैं. कई बार ये ब्‍लैक स्‍पॉट डीपीआर ( डिटेल्‍स प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट) की गलती की वजह से भी बन जाते हैं. नितिन गडकरी ने इस तरह के ब्‍लैक स्‍पॉट के निरीक्षण करने की जिम्‍मेदारी आरओ और पीडी को दे दी है. अभी तक इस तरह की जांच इंजीनियर करते थे. उनका मानना है कि इससे भविष्‍य में डीपीआर की वजह से ब्‍लैक स्‍पॉट बनने की संभावना कम होगी.

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4000 से अधिक ब्‍लैक स्‍पॉट

एनएचएआई के अनुसार वर्ष 2015-2018 के बीच नेशनल हाईवे पर लगभग 4002 ब्लैकस्पॉट की पहचान की गई थी. इन सभी ब्लैक स्पॉट के लिए कम अवधि के सुरक्षा उपायों को लागू किया गया है. वर्ष 2021-22 में लगभग 716 ब्लैक स्पॉट पर सुरक्षा उपायों को लागू किया गया है. बचे हुए ब्लैक स्पॉट को दीर्घकालिक सुरक्षा उपायों की मदद से खत्‍म किया जा रहा है.

ऐसे बनते हैं ब्लैक स्पॉट

ऐसी 500 मीटर की वो रोड, जहां पर तीन सालों में 5 भीषण हादसे, जिसमें 5 गंभीर रूप से घायल हुए या मौत हुई या फिर अलग-अलग हादसों में तीन वर्षों में 10 मौतें हुई हों. उसे ब्लैक स्पॉट मान लिया जाता है.

ब्लैक स्पॉट को खत्म करने की प्रक्रिया
ब्लैक स्पॉट दो तरह से खत्म किए जाते हैं. पहला शॉर्ट टर्म या दूसरा लांग टर्म.

शार्ट टर्म
इसमें संकेतक लगाना, जेब्रा क्रासिंग बनाना, मार्किंग रोड, साइड रोड पर ब्रेकर, सफेद पट्टी खींचना, सोलर लाइट और हाईमास्ट लाइट लगाना.

लांग टर्म
स्टडी के बाद सर्विस रोड, मेजर जंक्शन, पेडेस्ट्रियन अंडरपास, व्हीकल अंडरपास, फ्लाईओवर, फुट ओवर ब्रिज का निर्माण शामिल है.

ब्लैक स्पॉट खत्म इस तरह माना जाता है

स्पॉट पर किए गए निर्माण कार्य या बदलाव के बाद अगले 3 साल तक मोनीटर किया जाता है कि वहां पर हादसों की संख्या जीरो हुई या फिर कम हुई है. अगर ऐसा होता है तो उस ब्लैक स्‍पॉट को खत्म मान लिया जाता है. इसके लिए एनएनएचआई के आंकड़ों को पुलिस के आंकड़ों से मिलान करती है.

Tags: Road and Transport Ministry, Union Minister Nitin Gadkari

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