Sunday, July 14, 2024
Homeमहाराष्ट्रधरती से कैसे पता चल सकता है, अभी चांद पर रात है...

धरती से कैसे पता चल सकता है, अभी चांद पर रात है या दिन?

Day-Night on Moon: जापान के टोहो स्टूडियो की एक साइंस-फिक्शन फिल्म ‘डिस्ट्रॉय ऑल मॉन्स्टर्स’ में भविष्यवाणी की गई थी कि मानव 1999 तक चंद्रमा पर बस जाएगा. हालांकि, ऐसा नहीं हुआ और 1999 के बाद के इतने वर्षों में भी नहीं हो पाया है. लेकिन, स्थायी लूनर आउटपोस्‍ट या बस्ती के निर्माण की व्यवहार्यता पर गंभीर बातचीत शुरू हो चुकी है. साल 2016 में जारी साइंटफिक पेपर्स में तर्क दिया गया था कि 2022 तक 10 अरब डॉलर की लागत से एक छोटा मून बेस तैयार किया जा सकता है. चांद पर मानव बस्तियां बसाने की दुनियाभर में जारी चर्चा के बीच कल्‍पना कीजिए कि वहां बसने वाल लोगों का जीवन कैसा होगा?

इंसान को चांद पर बसने के लिए लंबी ठंडी रातों को सहन करने की आदत डालने के साथ ही कई दूसरे बदलावों के लिए खुद को ढालना पड़ेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि बेहद ठंडे तापमान के बाद भी चांद के कुछ इलाकों में रात के समय चमकदार रोशनी रहती है. अगर आपको चांद की रातों और दिनों के बारे में जानकारी नहीं है तो हम आपको इस बारे में बता रहे हैं. बता दें कि चांद का कोई स्थायी अंधेरे वाला हिस्‍सा नहीं है. हालांकि, चंद्रमा का एक हिस्‍सा कभी भी पृथ्वी के सामने नहीं आता है. क्‍या धरती से पता किया जा सकता है कि चांद पर इस समय रात है या दिन?

ये भी पढ़ें – Explainer: अंतरिक्ष में एस्ट्रोनॉट्स को रात-दिन का कैसे लगता है पता, 24 घंटे में देखते हैं कितने सूर्योदय-सूर्यास्‍त

चांद का कितना हिस्‍सा धरती से कभी नहीं दिखता?
चंद्रमा 27 दिन और कुछ घंटों में धरती के चारों ओर एक पूरा चक्‍कर लगा लेता है. यह लगभग उतना ही समय है, जितना चंद्रमा को अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने में लगता है. एक साथ दोनों चक्‍कर पूरा करने के कारण चंद्रमा का केवल एक ही हिस्‍सा धरती से देखा जा सकता है. इसी कारण चांद की सतह का करीब 41 फीसदी हिस्सा धरती पर मौजूद स्‍टारगेज़र्स को कभी दिखाई नहीं देता है. हालांकि, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि चंद्रमा किसी भी समय अपनी कक्षा में कहां है. इसका आधा हिस्सा लगातार सूर्य की रोशनी से प्रकाशित होता रहता है. सूर्य और पृथ्वी की सापेक्ष स्थिति चंद्रमा के चरणों को निर्धारित करती है.

Chandrayaan-3, Life on Moon, Oxygen on Moon, day and night on moon, Lunar Mission of ISRO, Solar Mission, Aditya L1, ISRO, NASA, Destroy all Monsters, Sci-fi Movies, Lunar outpost, Small moon base, Lunar Night, Lunar Day, Temperature on moon, Neil Armstrong, Cold nights on Moon, Pragyaan Rover, Vikram Lander, Space Science, Space Exploration, Space Knowledge, Knowledge News, Knowledge News in Hindi, News18, News18 Hindi
चंद्रमा 27 दिन और कुछ घंटों में धरती के चारों ओर एक पूरा चक्‍कर लगा लेता है.

कैसे तय होता है अमावस्‍या और पूर्णिमा का चरण?
मान लीजिए कि तीनों पिंड एक सीधी रेखा में रखे गए हैं. अब मान लें कि पृथ्वी और सूर्य के बीच में चांद है. ऐसे में चंद्रमा के धरती के नजदीकी भाग को सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता है और हमारे नजरिये से चांद पर अंधेरा होता है. इस चरण को अमावस्या कहा जाता है. वहीं, पूर्णिमा तब होती है, जब चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के उलटी दिशा में पड़ते हैं. बिना रुकावट सौर प्रकाश मिलने से चंद्र कक्षा में इस बिंदु पर चांद का धरती की तरफ का भाग चमकता है. लिहाजा, हमें धरती से दखने पर लगता है कि चांद पर रोशनी है.

ये भी पढ़ें – धरती का कौन-सा जीव चांद पर आराम से रह सकता है? नहीं पड़ती है ऑक्सीजन की जरूरत

कितने दिन अंधेरा, कितने दिन रहती है रोशनी?
अगर हम एक दिन को उस समय के तौर पर परिभाषित करते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करने के बाद सूर्य को चांद के क्षितिज पर उसी बिंदु पर लौटने में लेता है, तो हर चंद्र दिवस धरती के 29.5 दिन तक रहता है. इसका मतलब है कि हर कक्षा में चांद को दो सप्ताह से थोड़ा ज्‍यादा दिन का प्रकाश मिलता है. इसके बाद इतनी ही अवधि तक रात होती है. दूसरे शब्दों में चंद्रमा पर लगभग किसी भी जगह पर दो सप्ताह तक लगातार दिन का उजाला और उसके बाद दो सप्ताह तक लगातार अंधेरा रहता है.

ये भी पढ़ें – चांद पर एक लाख साल तक रह सकते हैं 8 अरब लोग, कहां से आएगी इतनी ऑक्‍सीजन?

चांद के किस हिस्‍से में हमेशा रहता है अंधकार?
चांद के ध्रुव इस मामले में अपवाद माने जाते हैं. पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है, लेकिन चंद्रमा का अक्षीय झुकाव केवल 1.6 डिग्री है. एर्गो उपग्रह की धुरी हमारे सूर्य से चंद्रमा तक यात्रा करते समय सौर प्रकाश के पथ के करीब-करीब लंबवत होती है. चांद के द्र ध्रुवों के करीब कुछ गहरे गड्ढे हैं, जिनके तल पर 2 अरब से ज्‍यादा वर्षों से सूर्य का प्रकाश नहीं देखा गया है. ये चांद का वो हिस्‍सा है, जहां कभी सूरज नहीं चमकता है.

Chandrayaan-3, Life on Moon, Oxygen on Moon, day and night on moon, Lunar Mission of ISRO, Solar Mission, Aditya L1, ISRO, NASA, Destroy all Monsters, Sci-fi Movies, Lunar outpost, Small moon base, Lunar Night, Lunar Day, Temperature on moon, Neil Armstrong, Cold nights on Moon, Pragyaan Rover, Vikram Lander, Space Science, Space Exploration, Space Knowledge, Knowledge News, Knowledge News in Hindi, News18, News18 Hindi
बिना वातावरण गर्माहट बनाए रखने के लिए चांद पर दिन से रात होने के दौरान तापमान में जबरदस्‍त उतार-चढ़ाव होता है.

दिन-रात के तापमान में कितना होता है अंतर?
वातावरण के बिना गर्मी बनाए रखने के लिए चांद पर दिन से रात होने के दौरान तापमान में जबरदस्‍त उतार-चढ़ाव होता है. चांद की सतह 260 डिग्री फारेनहाइट यानी 127 डिग्री सेल्सियस तक गर्म हो जाती है. ध्‍यान रहे कि ये हालात तब बनते हैं, जब चांद सूर्य की रोशनी से प्रकाशित हो रहा है. वहीं, जब सतह पर अंधेरा हो जाता है, तो तापमान -280 डिग्री फारेनहाइट यानी -173 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है.

ये भी पढ़ें – Explainer: प्‍लास्टिक फूड कंटेनर्स पुरुषों की फर्टिलिटी पर डालते हैं बुरा असर, लेकिन कैसे?

चांद से धरती पर दिखेगा अंधेरा या रोशनी?
अब तक किसी भी अंतरिक्ष यात्री को चांद के तापमान की चरम सीमाओं से दो-चार नहीं होना पड़ा है. नासा के अपोलो मिशन ने 1969 से 1972 तक नील आर्मस्ट्रांग और 11 दूसरे लोगों को चांद पर भेजा था. ये सभी खोजकर्ता चांद पर सुबह होने के ठीक बाद पहुंचे थे. हालांकि, इनके पहुंचने के समय तक चांद की सतह का तापमान अपने चरम यानी दोपहर के शीर्ष तक नहीं पहुंचा था. जैसे हम धरती से चांद के अलग-अलग चरणों में आकार बदलने को देखते हैं. ठीक वैसे ही चांद की सतह पर खड़े एक अंतरिक्ष यात्री को पृथ्वी क्षीण होती हुई दिखाई देगी. वहीं, अगर वह पूर्णिमा की रात को तारों को देखता रहे, तो धरती करीब-करीब पूरी तरह से अंधेरे में डूबी नजर आएगी.

ये भी पढ़ें – Explainer: क्या सूर्य भी घूमता है? अगर हां, तो जानिए किसके चारों ओर लगातार है चक्‍कर

क्‍या चांद से भी तारे टिमटिमाते हुए दिखेंगे?
धरती भी चांद की ही तरह सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करती है. हालांकि, चांद से धरती को देखें तो पृथ्‍वी से पूरे चांद को देखने के मुकाबले 55 गुना अधिक चमकीली दिखती है. पृथ्वी की परावर्तित सूर्य की रोशनी चंद्रमा के नजदीक की तरफ की चीजों को चमकदार रखती है, भले ही धरती के इस हिस्‍से पर दिन का समय हो या रात हो. चांद में कोई वायुमंडल नहीं है और सूरज के निकले होने पर भी चंद्रमा के दोनों ओर से तारे दिखाई देते हैं. जैसे ही चंद्रमा अपनी धुरी पर घूमता है और पृथ्वी की परिक्रमा करता है, आकाश में तारे दिखाई देने लगते हैं. फिर भी चंद्रमा से देखने पर तारे टिमटिमाते हुए नहीं दिखेंगे. दरअसल, खगोलीय जगमगाहट पृथ्वी के वायुमंडल के कारण होने वाला एक प्रकाश भ्रम है. तारों की रोशनी में हस्तक्षेप करने के लिए पृथ्वी जैसा कोई वातावरण नहीं होने के कारण चंद्रमा पर तारे टिमटिमाते हुए नहीं दिखाई देंगे.

Tags: ISRO, Mission Moon, Moon orbit, Space Exploration, Space knowledge

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_imgspot_img

Recent News

Most Popular

error: कॉपी करणे हा कायद्याने गुन्हा आहे ... !!