Saturday, May 18, 2024
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‘भारत अब चंद्रमा पर है’ : चांद पर चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद ISRO चीफ एस सोमनाथ का बयान

बेंगलुरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने बुधवार को कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता इसरो नेतृत्व और वैज्ञानिकों की पीढ़ियों की मेहनत का नतीजा है. उन्होंने कहा कि यह सफलता ‘बहुत बड़ी’ और ‘प्रोत्साहित करने वाली’ है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी दक्षिण अफ्रीका से ऑनलाइन माध्यम से इस जटिल मिशन के मुकाम तक पहुंचने के गवाह बनने के लिए जुड़े थे और उन्होंने भी वैज्ञानिकों की कोशिश की प्रशंसा की.

मिशन परिचालन परिसर में इसरो टीम को संबोधित करते हुए सोमनाथ ने कहा, ‘माननीय प्रधानमंत्री ने मुझे फोन कॉल किया और अपनी शुभकामनाएं आप सभी को और आपके परिवारों को इसरो में किए गए आपके शानदार कार्य के लिए दी हैं. चंद्रयान-3 और ऐसे अन्य मिशन में सहयोग देने के लिए मैं उनको धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. राष्ट्र के लिए हम जो प्रेरणादायक कार्य कर रहे हैं, उसे आगे बढ़ाने के लिए हमें प्रशंसा मिल रही है.’

इसरो प्रमुख ने सीएनएन-न्यूज़18 से विशेष बातचीत में कहा, “चंद्रयान-3 की सफलता देखकर हम सभी बहुत खुश हैं… यह बिल्कुल उसी गति से उतरा है जिसकी हमें उम्मीद थी, हम सभी यह देखकर उत्साहित हैं कि यह उस स्थिति में पहुंच गया है ताकि हम आगे और प्रयोग कर सकें. हम ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ को लेकर बहुत आश्वस्त थे. हम ट्रैक और ट्रैजेक्टरी को फॉलो कर रहे थे… हम किसी तरह की चिंता में नहीं थे.”

उन्होंने कहा, ‘चंद्रयान यात्रा चंद्रयान-1 के साथ शुरू हुई, यह पिछले कई वर्षों की यात्रा है… चंद्रयान-1 के दौरान चंद्रमा तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे हमने पूरा किया… अब हम भी कक्षा पर नियंत्रण के साथ-साथ ऐसी लॉन्चिंग कर सकते हैं, लेकिन लैंडिंग की चुनौती हमेशा किसी के लिए एक पहेली होती है जिसे इस बार सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है, हम इससे बेहद खुश हैं.’

इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ ने चंद्रयान-3 की सफलता के बाद कहा, ‘चंद्रयान-3 की सफलता ने हमें भविष्य में और अधिक चुनौतीपूर्ण अभियानों को पूरा करने का आत्मविश्वास प्रदान किया है.’ सोमनाथ ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा, ‘हमने चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग में सफलता हसिल कर ली है. भारत चांद पर है.’

सोमनाथ ने मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना करने वाले सभी लोगों का और इसरो के पूर्व प्रमुख ए एस किरन कुमार समेत अन्य वैज्ञानिकों का भी आभार जताया. उन्होंने कहा, ‘वे बहुत मददगार रहे, वे उस टीम का हिस्सा थे जो वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास बढ़ाते थे. इससे वैज्ञानिक अपने काम की समीक्षा करते थे और सुनिश्चित करते थे कि कोई गलती न हो.’

इसरो ने बुधवार को अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया इतिहास रचते हुए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ और 26 किलोग्राम वजनी रोवर ‘प्रज्ञान’ से लैस लैंडर मॉड्यूल की ‘सॉफ्ट लैंडिग’ कराने में सफलता हासिल की. भारतीय समयानुसार शाम करीब छह बजकर चार मिनट पर इसने चांद की सतह को छुआ.

सोमनाथ ने रेखांकित किया कि यह इसरो नेतृत्व और वैज्ञानिकों की पीढ़ियों की मेहनत का नतीजा है. उन्होंने कहा, “यह वह यात्रा है जो चंद्रयान-1 से शुरू हुई थी, जो चंद्रयान-2 में भी जारी रही और चंद्रयान-2 अब भी काम कर रहा है और बहुत से संदेश भेज रहा है.”

सोमनाथ ने कहा, “चंद्रयान-3 की सफलता का जश्न बनाने के साथ चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 बनाने वाली पूरी टीम के योगदान को याद किया जाना चाहिए और धन्यवाद ज्ञापित करना चाहिए.” उन्होंने कहा, “यह प्रोत्साहित करने वाली प्रगति है और निश्चित तौर पर बहुत बड़ी है.”

Tags: Chandrayaan-3, ISRO

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