Thursday, May 23, 2024
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Opinion: धारा 370 के हटने से कश्मीर घाटी की बदली तस्वीर, पत्थरबाजी बीते दिनों की बात

5 अगस्त को जम्मू कश्मीर से धारा 370 के खत्म हुए 4 साल पूरे हो रहे हैं. 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म करने क फैसला किया. पिछले चार सालों में कश्मीर में कई बदलाव किये गए जिससे कश्मीर घाटी की तस्वीर पूरी तरह से बदल गई है. केंद्र की नीतियों का नतीजा है कि आज कश्मीर में पत्थरबाजी इतिहास की बातें दिखती है, वहीं केंद्र की योजनाओं ने कश्मीर को विकास के पटरी में ला दिया है. यहां तक की आतंकी घटनाओं के लिए जाने जानी वाली कश्मीर घाटी के लोग आज अमन-ओ-चैन से रहने के आदी होते जा रहे है.

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1. पत्थरबाजी की घटना हुई खत्म- कश्मीर घाटी में एक वक़्त पत्थरबाजी की घटना आम होती थी. आए दिन पत्थरबाजी की घटना से लोगों की मौत तक हो जाती थी. लेकिन धारा 370 ख़त्म होने के बाद इस घटना में निरंतर कमी देखने को मिली. और सरकारी के आंकड़े के मुताबिक आतंकवादी-अलगाववादी एजेंडा के तहत 2018 में जहां 1767 संगठित पत्थर फेंकने की घटनाएं हुई, जो 2023 में मौजूदा तारीख तक शून्य हैं.

2. आतंकियों ने टेके घुटने – 370 खत्म होने के बाद केंद्र सरकार ने आतंकी घटनाओं को खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाई, आतंकी नेटवर्क नष्ट किए गए. सरकारी आंकड़े के मुताबिक, साल 2018 से 2022 के बीच आतंकी गतिविधियों में 45.2 फीसदी की कमी देखने मिली है.

3. विदेशी घुसपैठ में आई कमी- धारा 370 ख़त्म करने के बाद सेना ने घुसपैठ पर करारा प्रहार किया है. आलम ये है कि घुसपैठ की घटनाएं भी 2018 में 143 के मुकाबले 2022 में सिर्फ 14 रह गईं.

4. राज्य की कानून व्यवस्था में हुई सुधार- कानून-व्यवस्था के मामले भी 1767 से घटकर 50 रह गए. 2022 में सुरक्षा बलों के 31 सदस्यों की जान गई, जबकि 2018 में यह 91 थी.

5. आतंकी भर्ती में भी भारी कमी आई है. यह आंकड़ा 2018 में 199 था जो 2023 में आज की तारीख तक घटकर 12 पहुंच गया हैं.

7. जनता की बेहतरी के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. घाटी में औद्योगिक विकास के लिए केंद्र ने 28400 करोड़ रुपए का बजट रखा. केंद्र के आर्थिक नीति का आलम है कि आज आज जम्मू कश्मीर में 78000 करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश के प्रस्ताव आ चुके हैं.

8. पंचायती राज का आगाज हुआ- जिला विकास परिषदों के चुनाव के साथ ही त्रिस्तरीय पंचायतीराज की शुरूआत हुई है. लोगों की मांग को पूरा करते हुए कश्मीरी, डोगरी, उर्दू व हिंदी जैसी स्थानीय भाषाओं को भी आधिकारिक भाषाओं के रूप में जोड़ा गया है. विधायिका में अनुसूचित जनजाति के लिए सीटें आरक्षित की गई हैं, जो पहले नहीं थीं.

9. धारा 370 हटने के बाद ही जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाये गए. केंद्र सरकार के नीति का आलम है अपने इतिहास में पहली बार जम्मू और कश्मीर में एक विधिवत निर्वाचित 3-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली स्थापित की गई है. नवंबर-दिसंबर 2020 में जम्मू और कश्मीर में जिला विकास परिषदों के सदस्यों के लिए चुनाव हुए. आज जमीनी स्तर के लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों में 34,000 से अधिक निर्वाचित सदस्य हैं.

10. धारा 370 ख़त्म करने के फैसले से पहले अलगाववादियों की शह पर होने वाले सूबे में होने वाले बंद, हड़ताल और पत्थरबाजी न केवल  राज्य की आर्थिक सेहत पर बल्कि पूरे समाज पर बुरा असर डालती थी.  370 हटने से पहले स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, इंडस्ट्रीज का बंद होना हर दिन की बात थी. लेकिन आज स्कूल, कॉलेज हर दिन खुलते है. आज यहां के छात्र देश की मुख्यधारा से जुड़ते दिख रहे है.

Tags: Article 370, Jammu kashmir, PM Modi

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