Thursday, May 23, 2024
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Lok Sabha Election 2024: बीजेपी और आरएलडी गठबंधन पर पूर्ण विराम, भाजपा के लिए रालोद से अधिक बसपा मुफीद! 

हाइलाइट्स

पश्चिम का किला मजबूत करने के लिए बीजेपी ने बदली रणनीति.
बीजेपी के लिए पश्चिम में आरएलडी से ज्यादा मुफीद है बीएसपी!
जयंत चौधरी की RLD से गठबंधन नहीं करेगी भारतीय जनता पार्टी.

लखनऊ. मिशन 2024 की तैयारियों में जुटी बीजेपी ने पश्चिम यूपी को लेकर अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए आरएलडी के साथ गठबंधन पर विराम लगा दिया है. इसकी वजह साफ है कि बीजेपी को आरएलडी के साथ गठबंधन में कोई बड़ा फायदा पश्चिम यूपी में नहीं होने वाला है; क्योंकि जाट लैंड में बीजेपी की अपनी जीती हुई सीटें आरएलडी को गठबंधन में देनी पड़ेंगी. वहीं, बीजेपी जाट बाहुल्य इन सीटों पर वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत चुकी है. वहीं, विधानसभा चुनावों में 136 में से 93सीटें बीजेपी ने जीती थीं. उस समय सपा के साथ गठबंधन में आरएलडी को महज 8 सीटें मिलीं थीं.

दरअसल, बीजेपी के रणनीतिकारों का मानना है कि पश्चिम में बीजेपी की हारी हुई सीटों पर आरएलडी से ज्यादा बीएसपी मुफीद है, क्योंकि जाटव वोटों की संख्या निर्णायक है और बीएसपी का एकजुट जाटव वोट बैंक बीजेपी के साथ आने से बड़ा फायदा बीजेपी और बीएसपी दोनों को होगा. पश्चिम में बीजेपी ओबीसी और जाटव वोटबैंक के एकजुट होने से लोकसभा चुनावों में फायदे में रहेगी. ऐसे में बीजेपी के लिए आरएलडी के मुकाबले बीएसपी ज्यादा मुफीद है.

अमित शाह के 2014 के फार्मूले बढ़ेगी बीजेपी
वर्ष 2014 में यूपी प्रभारी अमित शाह ने बिना आरएलडी के चुनाव लड़ने का फैसला लिया. परिणाम आया कि उस चुनाव में छह बार बागपत की सीट से सांसद रहे स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह अपनी सीट नहीं बचा पाए थे. इतना ही नहीं उनके बेटे जयंत चौधरी को भी मथुरा में पहली बार चुनाव लड़ रही बीजेपी उम्मीदवार हेमा मालिनी ने मात दे दी थी. यानी बीजेपी की जाटलैंड में जाट वोट बैंक को लेकर जो टेंशन थी वह चुनाव परिणाम आने के बाद दूर हो गई थी.

2019 में भी नहीं बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा ने गठबंधन कर लिया था आरएलडी भी उनके साथ थी. चर्चा यही थी की ये गठबंधन बीजेपी के लिए काफी नुकसानदायक साबित होगा. लेकिन, जब परिणाम आए तो सारे कयास धरे के धरे रह गए. आरएलडी को इस गठबंधन में कुल 3 सीटें मिली थीं और उसे तीनों सीटों पर मात मिली थी. स्वर्गीय चौधरी अजीत सिंह को मुजफ्फरनगर सीट पर संजीव बालियान ने चुनाव में पराजित किया था, तो वहीं बागपत सीट पर जो आरएलडी का गढ़ माना जाता है, जयंत चौधरी को बीजेपी के सांसद सत्यपाल सिंह ने मात दे दी थी. इतना ही नहीं मथुरा की लोकसभा सीट पर आरएलडी के कुंवर नरेंद्र सिंह को हेमा मालिनी ने हरा दिया था और मार्जिन भी लगभग तीन लाख के आसपास थी.

2022 विधानसभा चुनाव में जाटलैंड में बड़ी जीत
अब 2022 के विधानसभा चुनाव की बात करते हैं जिसमें सपा के गठबंधन में आरएलडी ने पश्चिम में कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे. अगर पश्चिम की बात करें तो तकरीबन 136 सीटें पश्चिम में आती हैं. यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि किसान आंदोलन के बाद खासतौर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट वोट बैंक को लेकर एक तरीके से बीजेपी के भीतर भी चिंता थी, लेकिन जब चुनाव परिणाम आए तो जीत बीजेपी के खाते में ही जबकि सपा के साथ गठबंधन के बावजूद भी आरएलडी को 8 सीटों पर जीत मिली और उनके गठबंधन को कुल 43 सीटों पर जीत हासिल होता है. जबकि, बीजेपी ने वहां 93 सीटों पर जीत हासिल की.

जयंत चौधरी की तुलना में मायावती का बड़ा नाम
सूत्रों की मानें तो जयंत चौधरी पश्चिम की बागपत मुजफ्फरनगर अलीगढ़ कैराना और मथुरा सीट अपने लिए गठबंधन में चाहते हैं, लेकिन बीजेपी इन सीटों पर 2014 में भी जीत हासिल करने में कामयाब रही 2019 में भी उसे ही जीत हासिल हुई. बीजेपी का ये भी मानना है कि नगीना बिजनौर सहारनपुर रामपुर संभल अमरोहा ऐसी सीटें हैं, जहां पर वोटों का जो गणित है वह बीजेपी के लिहाज से उतना मुफीद नहीं. अगर इन सीटों पर जयंत चौधरी अपनी दावेदारी करें तो शायद बीजेपी को यह सीटें उन्हें देने में कोई ज्यादा दिक्कत नहीं आने वाली थी. लेकिन, अब बीजेपी लोकसभा के लिहाज से आरएलडी से ज्यादा बीएसपी को मुफीद मान रही है.

अजीत चौधरी के गढ़ में निकाय चुनाव जीती बीजेपी
उत्तर प्रदेश में हाल ही में नगर निकायों के भी चुनाव हुए अगर बागपत की खेकड़ा नगर पालिका की बात करें तो यह सबसे पुरानी निकायों में शामिल है. इसे अंग्रेजी हुकूमत में आजादी से बहुत पहले ही 1884 में टाउन एरिया कमेटी बना दिया गया था. इस नगर पालिका में आधे से अधिक जाट समुदाय के वोटर हैं, लेकिन नगरपालिका के चुनाव में इस सीट पर बीजेपी ने जीत हासिल की. यानी इस सीट पर जाट समाज का वोट बीजेपी के पक्ष में गया.

बीजेपी के लिए आरएलडी से ज्यादा मुफीद बीएसपी
वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी के 10 सांसद हैं. बिजनौर नगीना अमरोहा सहारनपुर अंबेडकरनगर श्रावस्ती लालगंज घोसी और गाजीपुर के साथ-साथ जौनपुर की लोकसभा सीट बसपा के खाते में है. इसमें अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों को देखें तो यहां बसपा अपने कोर वोट बैंक जाटव और मुस्लिम समाज के सहारे दूसरे दलों के लिए सबसे बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है. इसीलिए बीजेपी के लिए बसपा आरएलडी से बहुत ज्यादा मुफीद है, क्योंकि बीजेपी जहां पर कमजोर है. बसपा वहां बेहद मजबूत और अगर बसपा बीजेपी के साथ आती है तो ये सीटें जीतनी मुश्किल नहीं होगी.

बीएसपी को ये सीटें दे सकती भारतीय जनता पार्टी
बीजेपी के रणनीतिकारों का मानें तो जो पिछली बैठकों में चिंतन हुआ है कि अगर गठबंधन हुआ तो उनमें जो सीटें बीएसपी को देने की चर्चा है उनमें सहारनपुर,बिजनौर,नगीना और अमरोहा शमिल है.

बीजेपी शीर्ष नेतृत्व को भूपेंद्र चौधरी पर बड़ा भरोसा
बीजेपी के पास पश्चिम यूपी से बड़ा चेहरा भूपेन्द्र चौधरी हैं. भूपेंद्र चौधरी की पश्चिम में जमीनी नेताओं में गिनती होती है और जाट बिरादरी में भूपेंद्र चौधरी सर्वमान्य नेता हैं. यही नहीं चौधरी ने लंबे समय तक पश्चिम में संगठनात्मक काम देखे हैं. यही वजह है कि पश्चिम यूपी में हर बिरादरी में भूपेंद्र चौधरी का दखल है और भारतीय जनता पार्टी ऐसे में अपने चेहरे पर ज्यादा भरोसा कर रही है. भूपेंद्र चौधरी ने इस बात को साबित भी किया है कि जब से वह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के अध्यक्ष बने हैं उसके बाद बीजेपी ने गोला उपचुनाव के अलावा लोकसभा और विधानसभा के उपचुनाव में जीत हासिल की है. वहीं, भूपेंद्र चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी ने निकाय चुनाव में नगर निगमों में क्लीन स्वीप कर एक रिकॉर्ड भी बनाया है.

Tags: 2024 लोकसभा चुनाव, Loksabha Election 2024, Loksabha Elections, UP politics, लोकसभा चुनाव राजनीति

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