Thursday, May 23, 2024
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माफिया मुख्तार अंसारी की बहू को SC से नहीं मिली राहत, अंतरिम जमानत देने से इनकार, UP सरकार को नोटिस

नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी की बहू और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) विधायक अब्बास अंसारी की पत्नी निखत बानो को शुक्रवार को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है. निखत बानो की तरफ से दाखिल नियमित जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने आगामी 4 अगस्त तक यूपी सरकार से जवाब मांगा है.

निखत बानो को चित्रकूट जेल मे बंद अपने पति से गैरकानूनी तरीके से मुलाकात के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 मई को निखत बानो की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

उल्लेखनीय है कि इस मामले में सबसे पहले अब्बास अंसारी की पत्नी निखत बानो एवं ड्राइवर नियाज अंसारी को पुलिस एवं प्रशासन ने छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया था. उसके बाद निखत बानो को चित्रकूट जेल के पास मकान की व्यवस्था करवाने एवं बिना पर्ची के मुलाकात करवाने के आरोप में फराज खान को गिरफ्तार किया गया था.

इसी के साथ-साथ पुलिस ने आरोपी जेल वार्डन जगमोहन, जेलर संतोष कुमार, जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर व उप जेलर चंद्रकला को गिरफ्तार किया था. इस मामले में अब्बास अंसारी उनकी पत्नी निखत बानो, ड्राइवर नियाज अंसारी, फराज खान एवं नवनीत सचान के विरुद्ध विभिन्न धाराओं एवं आरोपों में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है. इस मामले की रिपोर्ट गत 11 फरवरी को थाना कोतवाली कर्वी में उप निरीक्षक श्याम देव सिंह ने दर्ज कराई थी.

मुख्तार अंसारी के बेटे उमर के खिलाफ दर्ज FIR नहीं होगी रद्द
एक अन्य मामले में, उच्चतम न्यायालय ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान नफरती भाषण देने से जुड़े मामले में गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया. उमर नफरती भाषण मामले में अपने विधायक भाई अब्बास अंसारी के साथ आपराधिक मुकदमे का सामना कर रहा है. उस पर मऊ जिले में आयोजित एक रैली में मंच साझा करने का आरोप है, जहां उसके भाई ने सरकारी अधिकारियों को चुनाव के बाद कथित तौर पर देख लेने की धमकी दी थी.

न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने कहा, ‘हम उस मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द नहीं करेंगे, जिसमें उच्च न्यायालय ने राहत देने से इनकार कर दिया है. आपको मुकदमे का सामना करना होगा.’ अब्बास अंसारी ने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मऊ सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. आरोप है कि अब्बास ने रैली में कहा था कि राज्य में सरकार बनने के बाद शुरुआती छह महीने में किसी भी सरकारी अधिकारी का तबादला नहीं किया जाएगा, क्योंकि ‘पहले हिसाब किताब होगा.’

Tags: Supreme Court

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