Sunday, July 14, 2024
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अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले लोकसभा में और मजबूत हुई NDA सरकार, मिला इन दो दलों के 34 सांसदों का समर्थन

नई दिल्ली: लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तारीख तय कर दी गई है, जिस पर 8 अगस्त को बहस शुरू होगी और 10 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब आने की उम्मीद है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर मुद्दे पर विपक्ष के दबाव और प्रधानमंत्री द्वारा संसद में इस पर बोलने की उसकी मांग को मानने से इनकार करने के बाद अब ध्यान उन तर्कों की जड़ पर केंद्रित हो गया है जो दोनों पक्ष अपना मामला बनाने के लिए पेश करेंगे.

रिपोर्ट में भाजपा सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी डेटा तैयार कर रही है जो पूर्वोत्तर में हिंसा और आगजनी के लंबे इतिहास को उजागर करेगा, जिसके अधिकांश हिस्से पर कांग्रेस का नियंत्रण था. वहीं विपक्ष इसे कई प्रमुख राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले, मोदी सरकार के डबल-इंजन सरकार के दावे पर चोट करने का शायद आखिरी मौका मानता है.

एनडीए के समर्थन में YSRCP के 22 और BJD के 12 सांसद और जुड़ेंगे
पहले से ही भाजपा के पक्ष में भारी बहुमत था, मंगलवार को उसे तब और मजबूती मिली जब बीजद ने घोषणा की कि वह अविश्वास प्रस्ताव पर सरकार का समर्थन करेगी. इससे पहले, वाईएसआरसीपी- जो बीजेडी की तरह एनडीए या इंडिया ब्लॉक के साथ गठबंधन में नहीं है- ने घोषणा की थी कि वह प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करेगी. जबकि प्रस्ताव को जीतने या हराने के लिए बहुमत का निशान 272 है, एनडीए सरकार के पास 331 सांसद हैं, जिनमें उसके अपने 303 सांसद हैं. इसमें YSRCP के 22 और BJD के 12 सांसद और जुड़ेंगे.

इसलिए यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि बहस में कौन अधिक राजनीतिक अंक प्राप्त करता है, जो कि सदन के अशांत सत्र के मद्देनजर आ रहा है, जिसके तूफानी होने की उम्मीद है. मंगलवार को भी, इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस को प्राथमिकता पर लेने की मांग करते हुए बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक से वॉकआउट कर दिया. जिन दलों ने कहा है कि वे प्रस्ताव पर सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे उनमें इंडिया ब्लॉक की 26 पार्टियों के अलावा केसीआर की भारत राष्ट्र समिति शामिल है.

मानसून सत्र शुरू होने के बाद से दोनों सदनों में कामकाज लगातार ठप
उन्होंने मंगलवार को मांग की कि जब तक अविश्वास प्रस्ताव लंबित है तब तक सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाएगी. लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक मनिकम टैगोर ने कहा, ‘हम चाहते थे कि अविश्वास प्रस्ताव पर कल ही चर्चा हो.’ सरकार ने कहा है कि इस संबंध में कोई नियम या मिसाल नहीं है, और प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद अध्यक्ष के पास बहस निर्धारित करने के लिए 10 दिन का समय होता है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गत 20 जुलाई को मानसून सत्र शुरू होने के बाद से संसद के दोनों सदन लगातार ठप रहे हैं. विपक्ष की मांग है कि पीएम मोदी पहले सदन के पटल पर मणिपुर की स्थिति पर बयान दें. उनका तर्क है कि अविश्वास प्रस्ताव प्रधानमंत्री को संसद बोलने के लिए बाध्य करने का एक साधन है, क्योंकि विपक्षी गठबंधन को पता है कि उनके पास संख्या बल नहीं है.

भाजपा ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर विपक्ष की जिद पर सवाल उठाया है और कहा है कि वह गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के साथ चर्चा के लिए तैयार है. उनका कहना है कि यह विपक्ष है जो बहस से कतरा रहा है. राज्यसभा के नेता पीयूष गोयल ने सोमवार को, कहा, ‘यह इस डर के कारण हो सकता है कि बहस उनकी (विपक्ष) कुछ सच्चाइयां में उजागर कर सकती है, या पूर्वोत्तर में एनडीए सरकार द्वारा लाए गए सकारात्मक बदलावों को उजागर कर सकती है… वैसे भी, यह यह स्पष्ट है कि वे चर्चा से भाग रहे हैं.’ भाजपा को अविश्वास प्रस्ताव से या उसके बिना चिंतित होने का कोई कारण नजर नहीं आता. सरकार अपने प्रमुख विधेयकों को बिना किसी मुश्किल के पारित कराने में कामयाब रही है.

इससे पहले 2018 में NDA सरकार के खिलाफ विपक्ष लाया था अविश्वास प्रस्ताव
भाजपा नेताओं ने 2018 में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव की बहस का भी हवाला दिया, जहां मोदी ने अपने जवाब में कांग्रेस पर बिना रोक-टोक हमला किया. रिपोर्ट में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से कहा गया है, ‘इसने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए माहौल तैयार कर दिया. हमारे वक्ता (पीएम मोदी) इस बार भी यह सुनिश्चित करेंगे कि विपक्ष को अविश्वास प्रस्ताव लाने के अपने फैसले पर पछतावा हो.’ पुणे में मंगलवार को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार स्वीकार करते हुए, पीएम मोदी ने उसी के संकेत दिए. उन्होंने 2014 से पहले ‘विश्वास की कमी’ की तुलना में अब नीतियों और लोगों की कड़ी मेहनत में ‘विश्वास बहाली’ की बात की.

Tags: BJP, Monsoon Session, Naveen patnaik, YSRCP

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