Thursday, February 22, 2024
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‘किसी आरोप का सवाल ही नहीं’, राज्यसभा में राघव चड्ढा के प्रस्ताव में फर्जीवाड़े के दावे पर AAP ने दी सफाई

हाइलाइट्स

राघव चड्ढा पर धोखाधड़ी के आरोपों का AAP ने जोरदार खंडन किया.
चयन समिति के प्रस्ताव में सदस्यों की लिखित सहमति या हस्ताक्षर की जरूरत नहीं.
ऐसे में फर्जी हस्ताक्षर के किसी भी आरोप का कोई सवाल ही नहीं है.

नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने राज्यसभा में दिल्ली सर्विस बिल (Delhi Services Bill) की चयन समिति (Select Committee) के लिए जो प्रस्ताव पेश किया था, उसमें धोखाधड़ी के आरोपों का पार्टी ने जोरदार खंडन किया है. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने मंगलवार को साफ किया है कि कार्यवाही के नियमों में कहा गया है कि ‘जिस सदस्य का नाम प्रस्तावित किया गया है उसकी कोई लिखित सहमति या हस्ताक्षर की जरूरत नहीं है.’ AAP के सूत्रों ने कहा कि ऐसे में ‘फर्जी हस्ताक्षर’ के किसी भी आरोप का कोई सवाल ही नहीं है.

AAP की यह सफाई तब आई जब पांच राज्यसभा सदस्यों ने शिकायत करते हुए कहा कि राघव चड्ढा ने दिल्ली सर्विस बिल के लिए सदन की प्रस्तावित चयन समिति में उनके नाम उनके हस्ताक्षर के बिना शामिल किए थे. यह आपत्ति जताने वाले पांच सांसदों में बीजेपी के एस फांगनोन कोन्याक, नरहरि अमीन और सुधांशु त्रिवेदी, एआईएडीएमके सांसद एम थंबीदुरई और बीजेडी के सस्मित पात्रा शामिल हैं. गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने दिल्ली सेवा विधेयक पर राज्यसभा में कहा कि ‘दो सदस्य-बीजद सांसद सस्मित पात्रा और भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी कह रहे हैं कि उन्होंने प्रस्ताव में चयन समिति का हिस्सा बनने के लिए AAP सांसद राघव चड्ढा द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. अब यह जांच का विषय है कि प्रस्ताव पर कैसे हस्ताक्षर किए गए थे.’

‘जाली हस्ताक्षर’ के आरोप का कोई सवाल ही नहीं
AAP के सूत्रों के मुताबिक राघव चड्ढा के खिलाफ विशेषाधिकार का प्रस्ताव पेश करने वाले सदस्यों ने राज्यों की परिषद में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों का हवाला दिया है. जिसमें कहीं भी यह नियम नहीं है कि जिस सदस्य का नाम का चयन समिति में शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है, उसकी लिखित सहमति या हस्ताक्षर की जरूरत है. AAP ने कहा कि चयन समिति के लिए प्रस्तावित सभी सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत नहीं है. जब हस्ताक्षर की जरूरत ही नहीं है, तो इसलिए ‘जाली हस्ताक्षर’ के किसी भी आरोप का कोई सवाल ही नहीं है.

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राघव चड्ढा का किसी को घेरने का इरादा नहीं
AAP के सूत्रों ने कहा कि चयन समिति का हिस्सा बनने के लिए केवल किसी सदस्य की सहमति या झुकाव की उसके पक्ष में राय की जरूरत है. राघव चड्ढा का किसी भी सदस्य को घेरने का कोई इरादा नहीं था. इन चयन समितियों में सभी प्रमुख दलों के सदस्य शामिल होते हैं. यह एक लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपरा और मिसाल है कि किसी विधेयक पर चयन समिति का गठन करते समय समिति में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सदस्यों को शामिल करके विविध प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाता है. चाहे वह सत्ता पक्ष से हों या विपक्ष से. चयन समिति के प्रस्ताव को सदन से स्वीकार या अस्वीकार किया जाना था. इस मामले में सदन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया. बहराहल नियमों में साफ कहा गया है कि अगर सदस्यों का समिति का हिस्सा बनने का कोई इरादा नहीं है, तो उनके नाम वापस लिए जा सकते हैं.

Tags: AAP, Amit shah, Raghav Chadha, Rajya sabha

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