Thursday, February 22, 2024
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पूर्वोत्तर में चीन सीमा तक होगी रेल कनेक्टिविटी, भूटान-म्यांमार को भी जोड़ने का प्लान, केंद्र ने जारी किए ₹1.20 लाख करोड़

हाइलाइट्स

उत्तर-पूर्व में बहुत जल्द पहली अंतरराष्ट्रीय सीमा पार रेलवे कनेक्टिविटी होगी.
इम्फाल-मोरेह लाइन को मंजूरी दे दी गई है.
उत्तर पूर्व के सीमावर्ती इलाकों सहित अरुणाचल प्रदेश में रेलवे लाइन बनाने की योजना पर चल रहा है काम.

गुवाहाटी: पूर्वोत्तर के राज्यों में केंद्र सरकार लगातार कनेक्टिविटी बढ़ाने पर कार्य कर रही है. इसके लिए कई तरह का प्लान बनाया जा रहा है और उसे अमल में लाया जा रहा है. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) सब्यसाची डे (Sabyasachi De) ने शनिवार को कहा कि उत्तर-पूर्व में बहुत जल्द अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय सीमा पार रेलवे कनेक्टिविटी होगी.

न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूर्वोत्तर के इलाकों में रेलवे कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार पहली बार 1.20 लाख करोड़ रुपये जारी किए हैं. देश की सीमा के करीब तक कनेक्टिविटी बढ़ाने के रेलवे के प्रयास के बारे में उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI को बताया कि हमारा ध्यान फिलहाल भारत-चीन सीमा और म्यांमार पर है. इम्फाल-मोरेह लाइन को प्रारंभिक मंजूरी दे दी गई है.

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उन्होंने आगे कहा कि ‘भारत और म्यांमार के बीच चल रहे कलादान मल्टीमॉडल परियोजना को जोड़ने के लिए सैरंग-हबिछुआ रेलवे लाइन को मंजूरी दे दी गई है. वहीं, भूटान को जोड़ने वाली कोकराझार-गेलेफू रेलवे लाइन और बांग्लादेश के अखौरा तक जाने वाली रेलवे लाइन अगरतला-अखौरा रेलवे प्रोजेक्ट को जल्द ही चालू कर दिया जाएगा. उत्तर पूर्व में जल्द ही पहली अंतरराष्ट्रीय सीमा-पार रेलवे कनेक्टिविटी होगी.’

उन्होंने आगे कहा ‘बहुत सारी सीमा पार परियोजनाएं भी हैं. हमारा ध्यान मुख्य रूप से सभी सीमावर्ती क्षेत्रों को जोड़ने और हमारे इन अंतरराष्ट्रीय पड़ोसियों के माध्यम से व्यापार बढ़ाने पर भी है.’ उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान उत्तर पूर्व में बहुत ही आसानी से लॉजिस्टिक्स के सामान को लाना है. इससे जाहिर तौर पर देश के इस हिस्से में उत्पादों की लागत कम होगी और रेलवे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उन्होंने आगे कहा कि सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाएं जो उत्तर पूर्व में चल रही हैं वे राज्य राजधानी कनेक्टिविटी परियोजनाएं हैं – हम सिक्किम, मिजोरम, मणिपुर और नागालैंड को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

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सब्यसाची डे ने कहा कि रेल मंत्रालय ने इस वित्तीय वर्ष में बॉर्डर एरिया में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 1.20 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है और हम उत्तर पूर्व के सीमावर्ती इलाकों सहित अरुणाचल प्रदेश में रेलवे लाइन बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा, हमारे पास स्टेशन विकास परियोजनाएं हैं. इसके अलावा, हमारे पास कुछ प्रमुख स्टेशन पुनर्विकास परियोजनाएं हैं, जैसे न्यू जलपाईगुड़ी, जो उत्तर पूर्व का प्रवेश द्वार है. उस स्टेशन को करीब 300-350 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया जा रहा है. इसके अलावा, दीमापुर रेलवे स्टेशन, पूर्वोत्तर में सबसे बड़े में से एक है. इसे 230 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया जाएगा. इसी तरह गुवाहाटी रेलवे स्टेशन को विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने की योजना है.

उन्होंने आगे कहा कि ‘अगले 10 सालों में, कई परियोजनाएं आकार लेती नजर आएंगी और आप कल्पना कर पाएंगे कि वास्तव में क्या हो रहा है. अभी, परियोजना की व्यवहार्यता, पर्यावरणीय व्यवहार्यता, परियोजना की आर्थिक व्यवहार्यता को देखने के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है. क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने घुसपैठ का पता लगाने वाली प्रणाली शुरू करके वन्यजीवों की सुरक्षा में देश का नेतृत्व किया है.’

Tags: Indian railway, North east railway

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