Thursday, May 23, 2024
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23 अगस्त, शाम 05.47 बजे चांद पर उतरेगा चंद्रयान-3, आखिरी 15 मिनट क्यों सबसे ज्यादा अहम

हाइलाइट्स

23 अगस्त को बुधवार का दिन होगा और शाम को पूरे देश की निगाहें चंद्रयान -03 पर टिकी होंगी
आखिरी 15 मिनट का समय वो होता है जब 30 किमी की ऊंचाई से चंद्रयान नीचे उतरना शुरू करेगा
इस दौरान उसकी गति में कई बार बदलाव होंगे, कुछ सेकेंड के लिए लैंडर विक्रम को बंद भी किया जाएगा

चंद्रयान -3 आज यानि 01 अगस्त को पृथ्वी की कक्षा में सबसे बड़ा ऑरबिट बनाते हुए उसके गुरुत्वार्षण से निकलकर चांद की ओर कूच कर जाएगा. इसके बाद अगले 23 दिन वह चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करते हुए अपने ऑरबिट को छोटा करेगा. फिर उसकी सतह पर उतर जाएगा. पिछली बार चंद्रयान -2 भारतीय समय के अनुसार रात में उतरा था लेकिन चंद्रयान -3 शाम को तभी उतरेगा, जब हम सभी जगे होंगे. हालांकि चंद्रयान2 की तरह इसके भी आखिरी 15 मिनट बहुत महत्वपूर्ण होंगे.

भारत के तीसरे चंद्र मिशन चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लांच किया गया था. अब ये पृथ्वी की सबसे बड़ी कक्षा 71351 किमी गुणे 233 किमी में है. अब ये पृथ्वी की कक्षा से निकल आधा सर्पिल रास्ता तय करके चांद की कक्षा में चला जाएगा.

अगर सबकुछ योजना के मुताबिक रहा तो लेंडर विक्रम 23 अगस्त को शाम 5.47 बजे चंद्रमा की सतह पर उतरेगा. यानि अगर इस तरह देंखें तो 23 अगस्त का बुधवार का दिन देश के सबसे अहम रहेगा. हम सभी की निगाहें चंद्रयान पर अटकी होंगी. हम सभी ये प्रार्थना कर रहे होंगे कि वो सकुशल चांद की सतह पर उतर जाए.

पिछली बार चांद के दक्षिणी हिस्से पर चंद्रयान – 02 ठीक तरीके से लैंड नहीं कर पाया था और उसका संपर्क फिर इसरो से टूट गया था. इसके बावजूद ये अभियान तमाम सीख दे गया. उसी के आधार पर चंद्रयान-03 को बनाया गया कि जो दिक्कतें 04 साल पहले चंद्रयान – 02 की लैंडिंग में हुईं थीं. वो इस बार नहीं हों.

Chandrayaan-3 Mission Update

चंद्रयान- 3 अब पृथ्वी की कक्षा से निकलकर चंद्रमा की ओर बढ़ा. (Image:ISRO)

वैसे ये तो पक्का सबसे ज्यादा सांस रोककर इतंजार करने वाले पल आखिरी 15 मिनट के ही होंगे. ये इस मिशन का शायद सबसे अहम समय होगा. 23 अगस्त को जैसे शाम के 05.32 बजेंगे तब इसरो के कंट्रोल सेंटर्स और दुनियाभर में स्पेस स्टेशनों के जरिए इस पर नजर रख रहे वैज्ञानिक सक्रिय हो जाएंगे. फिर तो एक-एक सेकेंड पर निगाहें और दिल सिर्फ ‘विक्रम’ पर अटकी रहेंगी. ये भारतीय अंतरिक्ष मिशन का ऐसा क्षण होगा, जिसमें सफलता के बाद इसरो के लिए बहुत कुछ बदल जाएगा.

आखिरी 15 मिनट में क्या होगा
लैंडर विक्रम को चांद की कक्षा से सबसे नजदीकी सतह पर उतरना है, ये काम करीब 30 किलोमीटर की ऊंचाई से शुरू होगा. लैंडिंग की शुरुआत के वक्त विक्रम की रफ्तार करीब 6 किलोमीटर प्रति सेकेंड रहेगी.
इन 15 मिनट के भीतर ही लैंडर को अपनी रफ्तार में जबरदस्त बदलाव करना होगा. सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग के लिए इसको अपनी रफ्तार 2 मीटर प्रति सेकेंड या 7 किलोमीटर प्रति घंटा तक लानी होगी.

आखिरी 15 मिनट क्यों कठिन होंगे
ये 15 मिनट और प्रक्रिया क्यों कठिन हैं, इसको समझने के लिए जानना जरूरी है कि विक्रम जब लैंडिंग प्रक्रिया शुरू करेगा, तो उसकी रफ्तार (6 किलोमीटर प्रति सेकेंड) एक आम हवाई जहाज की रफ्तार से करीब 30-40 गुना ज्यादा रहेगी. महज 15 मिनट के भीतर इस रफ्तार को कम करना.फिर जरूरी रफ्तार पर लाना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा. लैंडर की रफ्तार को कम करने के लिए ब्रेक का काम करेंगे इसमें लगे थ्रस्टर्स.

लैंडर विक्रम के लिए आखिरी 15 मिनट सबसे खास होंगे, लिहाजा ये समय पूरी तरह से सांसों को रोकने वाला होगा.

क्या काम होता थ्रस्टर् का
आमतौर पर थ्रस्टर्स का काम होता है किसी यान को रफ्तार देना, लेकिन वो तब होता है जब थ्रस्टर्स उस यान की चलने (या उड़ने) की दिशा के उलट चालू किए जाएं. विक्रम की लैंडिंग के केस में थ्रस्टर्स यान के चलने की दिशा में ही चलेंगे, जिससे विक्रम की रफ्तार कम की जा सकेगी.
विक्रम में कुल 4 थ्रस्टर्स लगे हुए हैं, जो एक साथ शुरू किए जाएंगे और फिर लैंडर की रफ्तार में कमी आएगी. इसके अलावा ये सभी थ्रस्टर्स बराबर ऊर्जा से चलेंगे.

लैंड होने के बाद क्या होगा
विक्रम के लैंड होने के करीब 3 घंटे बाद इसके साथ भेजा गया रोवर ‘प्रज्ञान’ एक रैंप की मदद से बाहर निकलेगा. फिर अगले कुछ दिन चांद की सतह पर घूम कर जरूरी डेटा जुटाएगा.

किस तरह इस बार नहीं होंगी पिछली गलतियां
1. पिछली बार लैंडर की स्पीड कम करने के लिए जो इंजन लगाए गए थे, उन्होंने जरूरत से थोड़ा ज्यादा थ्रस्ट यानी दबाव पैदा किया.’ इस वजह से जब लैंडर को स्थिर होना चाहिए था ताकि वह तस्वीरें ले सके, वह अस्थिर हो गया.

2. दूसरी गलती ट्रैजेक्टरी से जुड़ी थी. ज्यादा थ्रस्ट की वजह से ऐसी स्थितियां बनीं, जिन्हें समय रहते नियंत्रित नहीं किया जा सका. क्राफ्ट तेजी से मुड़ने लगा.

chandrayaan Lander

इस बार लैंडिंग साइट के लिए 500×500 मीटर के छोटे पैच के बजाय 4.3 किमी x 2.5 किमी के बड़े इलाके को टारगेट किया जाएगा.

3. तीसरी सबसे बड़ी गड़बड़ी लैंडिंग स्पॉट की थी. लैंडर चांद की सतह पर उतरने के लिए जगह की तलाश कर रहा था. जगह नहीं मिल रही थी. इससे वो संतुलित नहीं होकर गिर गया और सबकुछ खत्म हो गया. चंद्रयान-3 में इस गलती को सुधारा गया है. इस बार लैंडिंग साइट के लिए 500×500 मीटर के छोटे पैच के बजाय 4.3 किमी x 2.5 किमी के बड़े इलाके को टारगेट किया जाएगा.

ईंधन क्षमता बढेगी
इस बार चंद्रयान-03 की ईंधन की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी ताकि अगर लैंडर को लैंडिंग स्पॉट ढूंढने में मुश्किल हो तो वह किसी वैकल्पिक लैंडिंग साइट तक पहुंच जाए. इसमें ईंधन की कमी जैसी बाधा न आए.

ये हैं 15 मिनट की चुनौतियां
1. लैंडिंग की अवधि काफी खतरनाक होती है. लैंडिंग के लिए ऐसी जगह चुननी होगी जो समतल और सॉफ्ट हो.
2. चांद के दक्षिणी हिस्से की सतह काफी ऊबड़-खाबड़ है, जिसमें गड्ढे और पहाड़ हैं
3. लैंडिंग की सतह 12 डिग्री से ज्यादा उबड़-खाबड़ नहीं होनी चाहिए, ताकि यान में किसी तरह की गड़बड़ी न हो
4. चांद की सतह पर उतरने के बाद तीन घंटे तक विक्रम सतह का जायजा लेता रहेगा
5. करीब तीन घंटे बाद विक्रम का दरवाजा खुलेगा. फिर अंदर से प्रज्ञान बाहर निकलेगा
6. जब चंद्रयान-2 की दूरी केवल 10 मीटर रह जाएगी तो उसके 13 सेकेंड के अंदर यह चांद की सतह को छू लेगा।
7. 400 मीटर की ऊंचाई पर ही इसरो के कंट्रोल रूम से विक्रम को थोड़ी देर के लिए बंद किया जाएगा
8. चांद की सतह पर उतरने के 15 मिनट बाद लैंडर विक्रम वहां की पहली तस्वीर इसरो के कंट्रोल रूम में भेजेगा

Tags: Chandrayaan-3, ISRO, Mission Moon, Moon, Moon orbit

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