Saturday, May 18, 2024
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Opinion: मोदी ने पुरातन काशी को नूतन सौंदर्य दिया

गंगा के किनारे बसी काशी हजारों साल से ज्ञान की पीठ रही है। ऐसी पीठ, जिससे ज्ञान एवं अध्यात्म की ऐसी ज्योति निकलती है जिसका प्रकाश लेने के लिए दुनिया के लगभग हर देश से पर्यटक, श्रद्धालु एवं विद्यार्थी आते हैं। आध्यात्मिक नगरी होने के कारण काशी का महात्मय तो था लेकिन फिर भी अच्छी रोड से लेकर ट्रीटमेंट प्लांट, नेक्स्ट जेनरेशन इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर ट्रांसपोर्ट फैसिलीटीज तक की असुविधा अखरती थी।

इस बीच 2014 आता है और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से सांसद बनकर देश के प्रधानमंत्री बन जाते हैं। ये वो समय था जिसके बाद वाराणसी ने पीछे पलट कर नहीं देखा। हाइवे, मल्टी मोडल टर्मिनल, उद्योगों को नया जीवन, सिटी कमांड के जरिए ट्रैफिक मैनेजमेंट, अंडरग्राउंड केबलिंग, साफ सुथरे घाट और उन पर लगी हेरिटेज लाइट, गलियों की साफ सफाई, दीवारों की पेंटिंग और काशी के स्वामी बाबा विश्वनाथ मंदिर के आस-पास कॉरिडोर का निर्माण..

क्या कुछ नहीं हो रहा वाराणसी में !
वाराणसी के विकास के लिए नरेंद्र मोदी का विजन कितना संगठित था, इसे यूँ समझना होगा कि ये केवल जगहों के निर्माण या साफ सफाई तक ही सीमित नहीं है बल्कि ये आर्थिक समृद्धि से भी जुड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कई अवसरों पर कहा कि कृषि के बाद रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र टेक्सटाइल है और अपनी इस बात का ध्यान प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी में रखते हुए बुनकरों के लिए कई आवश्यक योजनाएं शुरू करवाई। दीनदयाल हस्तकला संकुल की स्थापना के साथ ही प्रधानमंत्री ने वाराणसी के हथकरघा उद्योग को मेक इन इंडिया के साथ साथ स्किल इंडिया कार्यक्रम से भी जोड़ दिया। अब कारीगरों को तकनीक एवं कौशलता का प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा। इसके लिए 305 करोड़ रुपए की लागत से एक टेक्सटाइल फैसिलिटेशन सेंटर का निर्माण हुआ एवं इसके साथ ही 9 स्थानों पर बुनकरों को उत्कृष्ट उत्पादन सुविधा के लिए कॉमन फैसिलिटेशन सेंटर भी बनाए गए।

शिक्षा के क्षेत्र में आज वाराणसी के पास स्मार्ट स्कूल, कौशल विकास केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में वाराणसी के पास आज अभूतपूर्व विश्वसनीयता है। सांस्कृतिक क्षेत्र में अनगिनत काम हुए हैं लेकिन सारनाथ के धमेख स्तूप में होने वाले साउंड एंड लाइट शो को लोग भूल जाते हैं इसलिए उसका उद्धरण देना जरुरी है। ये सारे विकास कार्य वाराणसी में यूँ ही नहीं हो गए बल्कि इसके लिए कई ‘न भूतो न भविष्यति’ की चुनौतियों से होकर गुजरना पड़ा। आज जो हमें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कॉरिडोर दिखता है, उसका बनना इतना आसान नहीं था। घनी बस्ती के बीच बसे विश्वनाथ मंदिर के चारों ओर का इलाका खाली होना था। धाम के लिए 320 भवनों को क्रय करने और धाम के लिए अपेक्षित क्षेत्र तैयार करने से पहले वैचारिक चुनौती से भी गुजरना था, ऐसी चुनौती जिसमें सैकड़ों परिवार भ्रमित और चिंतित थे। यहाँ से नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने काम आसान किया। मोदी की विश्वसनीयता ने जल्द ही स्थितियां को सामान्य कर दिया और ये मोदी मैजिक ही था कि कुछ समय में ही भवन स्वामी अपने-अपने पैतृक भवन सहर्ष देने को तैयार हो गए। सबकी सहमति और समर्थन मिलने के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम शुरू हुआ और फिर परिसर में भक्तों के लिए हर सुविधा मुहैया कराई गई। विस्तार के दौरान आसपास के भवनों से 27 मंदिर विग्रह प्राप्त हुए। इन सभी को पुरातन भव्यता के साथ जीर्णोद्धार करके एक मणिमाला की तरह पुन: स्थापित किया गया है। एक तरह से विश्वनाथ धाम देश का अब तक का सर्वाधिक अत्याधुनिक और सर्वसुविधा सम्पन्न धर्मस्थल बन गया है।

प्रधानमंत्री मोदी की देख-रेख में पिछले लगभग एक दशक में वाराणसी का कायाकल्प हो चुका है। रिंग रोड, रामनगर मल्टी मॉडल टर्मिनल, बाबतपुर फोरलेन, दीनापुर एसटीपी, सीवरेज पंपिंग स्टेशन जैसे कई काम तो दिख ही रहे हैं और रेल, रोड, पानी, घाट, शिक्षा और टूरिज्म से जुड़े अभी ऐसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स लाइन में हैं, जिनसे सिर्फ एक परिवार और एक पीढ़ी नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों का भविष्य भी सुधर जाएगा।

(डिस्‍क्‍लेमर- ये लेखक के निजी विचार हैं.)  

Tags: Narendra modi, Opinion

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