Thursday, June 13, 2024
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‘अविश्वास प्रस्ताव पर तुरंत बहस हो’, कांग्रेस ने दिया 1978 का हवाला, केंद्र ने कहा- 10 दिन का समय है

नई दिल्ली. सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने गुरुवार को भारत की विदेश नीति के घटनाक्रम पर विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान के दौरान विपक्षी सांसदों के हंगामे पर आपत्ति जताई और कहा कि वे लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को सदन में बोलने नहीं देंगे. जब अध्यक्ष ने चौधरी से व्यवस्था का प्रश्न उठाने के लिए कहा, तो केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल खड़े हो गए और कहा कि वह दिन में विदेश मंत्री के बयान में व्यवधान के विरोध में कांग्रेस नेता को बोलने की अनुमति नहीं देंगे.

चौधरी ने कहा कि मई 1978 में लोकसभा में विपक्ष के तत्कालीन नेता सी एम स्टीफन द्वारा मोरारजी देसाई सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को तुरंत बहस के लिए लिया गया था, यह सुझाव देते हुए कि मोदी सरकार के खिलाफ भी अविश्वास प्रस्ताव तुरंत ऊपर लाया जाना चाहिए था. संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि प्रस्ताव अध्यक्ष के संज्ञान में है और इस पर विचार करने के लिए 10 दिन का समय है. जोशी ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के पास संख्या बल है और अध्यक्ष जब भी फैसला करेंगे, वह मतदान का सामना करने के लिए तैयार है.

कांग्रेस ने मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर संसद में जारी गतिरोध के बीच बुधवार को लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिस पर चर्चा के लिए सदन ने मंजूरी भी दे दी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सभी दलों के नेताओं से बातचीत करने के बाद इस प्रस्ताव पर चर्चा की तिथि तय करेंगे. निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई द्वारा पेश इस प्रस्ताव को लोकसभा ने चर्चा के लिए स्वीकृति प्रदान की.

मुख्य विपक्षी दल ने यह भी कहा कि यह प्रस्ताव विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) की ओर से सामूहिक तौर पर लाया गया है. मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद के भीतर जवाब मांग रहे विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से कांग्रेस ने इस रणनीति के साथ यह कदम उठाया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सदन में बोलने के लिए बाध्य किया जा सके.

मोदी सरकार के खिलाफ दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव
विगत नौ वर्षों में यह दूसरा अवसर होगा जब मोदी सरकार अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी. इससे पहले, जुलाई, 2018 में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाया था. इस अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में सिर्फ 126 वोट पड़े थे, जबकि इसके खिलाफ 325 सांसदों ने वोट दिया था. इस बार भी अविश्वास प्रस्ताव का भविष्य पहले से तय है क्योंकि संख्याबल स्पष्ट रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में है.

लोकसभा की 543 सीट में से पांच अभी रिक्त हैं. इनमें से 330 से अधिक सांसद भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अन्य घटक दलों के हैं. कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के उसके साथी दलों के सदस्यों की संख्या 140 से अधिक है. करीब 60 सांसदों का संबंध उन दलों से है जो दोनों गठबंधनों का हिस्सा नहीं है.

Tags: BJP, Congress, Lok sabha, Parliament Monsoon Session, Rajya sabha

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