Thursday, June 13, 2024
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Opinion: 2014 से भारत चीन सीमा पर मोदी सरकार का मिशन इंफ्रास्ट्रक्चर-अब पीछे नहीं हटेगा भारत

2014 से अब तक भारत-चीन सीमा पर किसी भी चीनी की गतिविधि या फिर उनकी सेना के जमावड़े के मुकाबले ज्यादा तेजी से अपनी सेना तैनात कर रहा है। पहले चीन का हमेशा फर्स्ट मूवर एडवांटेज होता था। भारत चीन सीमा पर अपने इलाकों में निर्माण का काम वो तेजी से कर लेते थे और फिर उनका जोर होता था कि चीन ने जो बना लिया सो तो ठीक ही है लेकिन भारत उसके सामने अपनी सीमा पर निर्माण नहीं करे। सूत्रों के मुताबिक 2020 गलवान के बाद दोनो देशों के बीच आपसी भरोसे में कमी आयी ही है लेकिन इन तीन सालों में भारत ने अपनी सीमा पर इतनी कनेक्टीविटी बढा ली है कि अब लद्दाख से पूर्वोत्तर के राज्यों में भारत अपनी चीन सीमा पर से पीछे नहीं हटेगा। सरकारी सूत्र बता रहे हैं कि सीमा पर भारत तेजी से अपने इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है। मोदी सरकार की कमीटमेंट है कि सीमा पर क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए जिसमें सीमा पर बसे गांवों में सभी सुविधाएं देना भी शामिल है। ताकि सीमा पर आवाजाही और गतिविधियां हर मौसम में बनी रहे।

पीएम मोदी का भारत के सीमावर्ती इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर
सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी बढाना देश की आंतरिक सुरक्षा, सीमावर्ती इलाकों के विकास और आंचलिक विकास में खासा योगदान देता है। इसमें मोदी सरकार की नेबरहुड फर्स्ट नीति, इज ऑफ डुईंग बिजनेस, इज ऑफ लिविंग, सीटीजन फेंडली एप्रोच एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। इस नेबरहुड फर्स्ट के तहत सिर्फ चीन ही नहीं भारत की सीमा से लगने वाले बाकि देश भी शामिल हैं। इसके तीन लक्ष्य होते है।
1) सीमावर्ती गांवों में रह रहे भारतीयों की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाना.
2) राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहतर बनाना और जब भी जरुरत पड़े तब सेना की तैनाती की जाए.
3) भारत की सीमा से लगने वाले मित्र राष्ट्रों से व्यापार बढाने की कोशिशें तेज हों ताकि सीमावर्ती गांवों में रोजगार बढे़.

मोदी सरकार ने अपने बजट में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर आवंटन 2023 में 14387 करोड कर दिया। जबकि 2014 से पहले ये सिर्फ 3200 करोड के करीब हुआ करता था। चीन की सीमा पर मोदी सरकार ने 6000 किमी लंबाई में सडक का निर्माण किया। बीआरओ ने कश्मीर, लद्दाख से पूर्वोत्तर तक 2645 किमी सडक प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। अरुणाचल सीमा पर सडक बनाने का 1800 किमी का प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। ब्रिज, टनेल, के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया है। अब मौसम के कारण रास्ते बंद होना कम होता जा रहा है। एलएसी पर बसे लोगों के लिए जिंदगी आसान बनाना, उनके लिए इज ऑफ लिविंग, इनके लिए मोदी सरकार का ह्यूमन सेंट्रीक एप्रोच सीमा पर सेना की उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। मोदी कैबिनेट के मंत्री सीमा पर गांवों में रात बिता रहे हैं। ये संभव हुआ क्योंकि सभी संबंधित मंत्रालय मिलजुल कर अपनी भूमिका निभा रहे थे.
भारत चीन सीमा
भारत चीन सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देकर कनेक्टिविटी बढाने के पीछे सबसे बड़ा कारण सीमाओं की सुरक्षा को लेकर ही है। 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार के आने के पहले इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं करने की सरकारी उपेक्षा के कारण ही सीमा पर सेना की जल्दी से जल्दी तैनाती पर असर पड़ता था। लेकिन पीएम पद संभालने के बाद मोदी सरकार ने कई कदम उठाए जिससे इन 9 सालों में सीमा तक कनेक्टिविटी मजबूत होती चली गयी।

बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन बीआरओ का बजट 2013-14 में सिर्फ 3782 करोड था जो कि 2023-24 में बढ कर 14,387 करोड़ हो गया। 2014-2022 में सीमावर्ती इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 6806 किमी सड़कों का निर्माण हुआ जबकि 2008-14 तक ये सिर्फ 3610 किमी था। 2014-22 तक कुल 22,439 मीटर ब्रिज बने जबकि कांग्रेस राज में 2008-14 के बीच सिर्फ 7270 मीटर ब्रिजों का निर्माण हो पाया था। पिछले तीना सालों में भारत चीन सीमा पर 5 टनेल बनाए जा चुके हैं। 10 और टनेल के निर्माण का का चल रहा है। इनमें से मुख्य हैं 9.02 किमी लंबी और पूरे साल खुली रहने वाली अटल टनेल जो लाहौल-स्पीती घाटी को जोड़ती है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश में सेला टनेल का काम भी पूरा हो चला है।

इसके अतिरिक्त 1800 किमी लंबा एक फ्रंटियर हाईवे पर काम चल रहा है जो अरुणाचल प्रदेश में तमाम घाटियों को आपस में जोडेगा। भारत को इसका बहुत बड़ा फायदा मिलेगा क्योंकि इस हाईवे का असर अरुणाचल के अंदर की ही नहीं बल्कि सीमावर्ची इलाकों से कनेक्टिविटी पर भी पडेगा। ब्रिजों का तेजी से बनना, रोड बनाने के लिए बेबतर तकनीकि और मोदी सरकार का तेजी से इन कार्यों को मंजूरी देना साबित करता है कि नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए कितनी कटिबद्ध है।

भारत नेपाल सीमा
ये एक अपने तरह की अनूठी सीमा है जिस का एकमात्र ध्येय है लोगों और सामान की बिना रुकावट के आवाजाही। मोदी सरकार ने इस कनेक्टिविटी पर भी विशेष ध्यान दिया है ताक नेपाल की सीमा से लगे बिहार और उत्तर प्रदेश को विशेष लाभ हो। बीरगंज-रक्सौल सीमा पर 2018 में , बिराटनगर जोगबनी में 2020 में, नेपालगंज- रुपाईडीहागंज में 2023 मे इंटिग्रेटेड चेक पोस्ट बनाए गए हैं। भैरहवा-सुनौली में आईसीपी पर काम चल रहा है और दोधारा-चांदनी में आईसीपी के लिए समझौते किए जा चुके हैं। रेल मार्ग से भी दोनो देशों को जोडा जा रहा है। कुर्था-बीजलपुरा रेल मार्ग शुरु हो चुका है और बीजलपुरा-बार्डीबास मार्ग पर सर्वे चल रहा है। जोगबनी-बिराटनगर लिंक को कार्गो ट्रैफिक के लिए 2023 मे खोला जा चुका है। रक्सौल-काठमांडू ब्रॉड गेज लाइन के लिए लोकेशन का सर्वे का काम जारी है।

नेपाल की तराई वाली सड़कों को जोडने के 14 प्रस्तावों में 13 पूरे हो चुके हैं और 2014 के मोचर व्हीकल समझौते के बाद दोनो देशों के बीच गाडियों की आवाजाही का काम आसान हो गया है। मेछी ब्रिज 2021 मे पूरा हो गया था और धारचुला की महाकाली नदी के ऊपर एक ब्रिज भी बनाया गया है। 2023 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत झूलाघाट और शीर्शा में दो और ब्रिज भारत ने बनाए हैं। बिजली की सप्लाई के लिए दोनो सीमाओं के अंदर ट्रांसमिशन लाईने तैयार की गयी हैं। एक मुजफ्फरपुर-धालकेबर 2016 में और कंटिया-परवनीपुर में 2017 में पूरी हो चुकी है जबकी बटवाल और गोरखपुर के बीट ट्रांसमिशन लाइन पर काम जारी है।

उधर तेल के लिए नेपाल की चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों की पाइपलाईन मोतीहारी से अमलेखगंज तक पूरी होचुकी है जिसे चीतवान तक बढाने का काम चल रहा है। दूसरी पाईपलाईन सिलिगुरी से झापा तक की योजना तैयार हो चुकी है। इन योजनाओं के कारण सीमा पर के चेक नाके, रेल और रोड यातायात, बिजली की सप्लाई, पेट्रोल की कीमतें काबू में ऱखने के साथ साथ उसकी उपलब्धता भी बनाए रखी जा रही है। इसका फायदा दोनों देशों को हुआ है।

भारत-भूटान सीमा
पीएम मोदी सत्ता संभालने के बाद अपनी सबेस पहली विदेश यात्रा पर भूटान ही गए थे। मोदी सरकार का पूरा जोर है भूटान की सीमा से लगे भारत के सभी राज्यों के साथ व्यापार और पर्यटन को बढावा मिले। जयगांव में एक कस्टम स्टेशन को इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट में बदला गया है। भूटान ने ये भी मांग की है कि असम और बंगाल में विदेशियों के लिएअतिरिक्त चेक पोस्ट बने जिससे दोनों देशों के बीच पर्यटन का फायदा हो। गिलेफू और कोकराझाड के बीच एक रेल लिंक बनाने के लिए असम सीमा पर जगह तलाशी जा रही है।

भारत-बांगलादेश सीमा
मोदी सरकार की नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत नेपाल की तरह ही बांग्लादेश के साथ भी रेल, रोड, सीमा पर आवाजाही, बिजली और तेल की सप्लाई को लेकर प्राथमिकता बरकरार है। भारत वहां के चट्टोग्राम और मोगला पोर्ट को इस्तेमाल करने के लायक बनाने के काम में लगा है ताकि हमारे पूर्वोत्तर के राज्यों और पश्चिम बंगाल को आर्थिक फायदा हो। 5 बस सेवाएं काम कर रहीं हैं। 3 क्रॉस बॉर्डर पैसेंजर ट्रेन सोवा और दो नदी मार्ग से आवाजाही के रास्ते खुले हैं ताकि लोगों का संपर्क और सहयोग बना रहे। भारत से बिजली की आपूर्ति और नेपाल से आने वाली बिजली को ट्रांजिट रुट देना और भारत के द्वारा निर्मित मैत्री पावर प्लांट बांग्लादेश की एनर्जी सप्लाई को दुरुस्त कर रहा है। साथ ही नुमालीगढ और पार्वतीपुर पाईपलाईन पेट्रोलियम और पेट्र्रों उत्पादों की सप्लाई को आसानी से पूरी कर रहा है।

भारत म्यांमार सीमा
भारत जानता है कि म्यांमार की आंतरिक स्थिति वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में खासी मुश्किलें पैदा कर रहे हैं। इसमें निर्माणाधीन एक ट्राईलेटरल हाईवे भी है जिसमें 69 ब्रीज भी बनने हैं। मोदी सरकार इसका रास्ता निकालने की कोशिश में लगी है।

भारत श्रीलंका सीमा
भारत सरकार ने श्रीलंका को वायदे के अनुसार दो फेरी सेवाएं शुरु की हैं। नागापट्टीनम-कनकेशनथुराई के साथ साथ रामेश्वरम-तलईमन्नार से भारत श्रीलंका के बीच फेरी सेवा चलेगी। मोदी सरकार ने चेन्नई और जाफना के बीत हवाई यात्रा भी शुरु की है। साथ ही विमान सेवाओं को बढाने पर भी विचार चल रहा है। भारत ने श्रीलंका के साथ ग्रीड कनेक्टिविटी की संभावना तलाशने की दिशा में काम शुरु कर दिया है, पेट्रोलियम पाइपलाईन और साथ ही दोनों देशों के भी एक ब्रिज भी बनाने की दिशा में भी दोनो देश सोंच रहे हैं।

अब दुनिया देख रही है कि भारत की सभी सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार आया है। मिशन इंफ्रास्टक्चर ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खासी मजबूती दी है औऱ साथ ही आर्थिक विकास के मौके भी बढाए हैं। पीएम मोदी जानते हैं कि इससे सीमा पर रहने वाले लोगों की जिंदगी सुधरने लगी है। 2014 से पीएम मोदी ने अपने ऑल द गवर्नमेंट एप्रोच से भारत की सीमा पर रह रहे इलाकों को मुख्यधारा से जोडने में अभूतपूर्व सफलता पायी है। ये एप्रोच ऐसा है जिसमें तमाम मंत्रालय विदेश ,रक्षा, गृह, उर्जा, सड़क परिवहन और हाईवे, रेलवे, पेट्रोलियम, शिपिंग विकास के लिए एक साथ मिलजुल कर काम करते हैं ताकि देश के लिए बने लक्ष्य को पूरा कर सकें।

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

Tags: India china border, PM Modi

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