Sunday, July 14, 2024
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इश्क़, इंकलाब और इंसानियत के कवि शैलेंद्र के तराने दशकों बाद आज भी तैरते हैं संगीत प्रेमियों की ज़ुबान पर

“ज़ख्मों से भरा सीना है मेरा, हंसती है मगर यह मस्त नज़र…” गीत के माध्यम से प्रतिकूल परिस्तिथितियों में भी जिजीविषा, आत्मविश्वास और स्वाभिमान का मंत्र देकर करोड़ों लोगों को जीतने का हौसला देना वाले और सिने प्रेमियों को अपने लोकप्रिय गीतों से रिझाने वाले अमर गीतकार शैलेंद्र का आज (30 अगस्त) जन्मदिन है. शैलेंद्र फिल्म जगत के उन चुनिंदा गीतकारों में रहे हैं, जिन्हे एक तो वहां स्थापित होने में तमाम मुश्किलों से दो-चार होना पड़ा, दूसरे उनके शब्द जितना पर्दे पर सुख देते हैं, उतनी ही गंभीर पठनीयता का स्वाद उन्हें पढ़ते समय मिलता है. दुखद ये रहा कि वह मात्र 43 वर्ष की उम्र में ही दुनिया छोड़ कर चले गए. शैलेंद्र अगर और ज्यादा दिनों तक जीवित रहते तो और भी नजाने कितनी खूबसूरत रचनाएं संगीत और साहित्य प्रेमियों की ज़िंदगी का हिस्सा होतीं.

शैलेंद्र की कविताएं कोरी कल्पना की उड़ान न होकर जीवनानुभव से रची-बसी अपने समय और समाज का जीवंत दस्तावेज हैं. इश्क़, इंकलाब और इंसानियत के जनकवि शैलेंद्र कार्ल मार्क्स, कबीर, पुश्किन और निराला से खासा प्रभावित थे. वैसे देखा जाए, तो शैलेंद्र हिंदी फिल्मों के सबसे बड़े गीतकार थे, जिन्होंने जो भी लिख दिया वो लोगों के दिल को छू गया और गीतों की बात की जाए तो एक से एक हिट गाने लिखे उन्होंने, जिन्हें आज भी सुनना एक खूबसूरत अनुभूति से भर देता है.

शैलेंद्र का एक बहुत खास गीत है जिसे मोहब्बत करने वाला हर दिल ज़रूर गुनगुनाता है, गीत के बोल हैं “प्यार हुआ इकरार हुआ है प्यार से फिर क्यों डरता है दिल…’ और आपको बता दें, कि राखी का सबसे लोकप्रिय गीत, “बहना ने भाई की कलाई पर प्यार बांधा है, प्यार के दो तार से संसार बांधा है…” भी शैलेंद्र ने ही लिखा था. कहा जाता है, इस गीत से उन्हें बड़ा लगाव था, क्योंकि वह अपनी बहन को बहुत प्यार करते थे, लेकिन इलाज के लिए पैसे न होने की वजह से वह उसे बचा नहीं पाए, जिसका उन्हें सारी ज़िंदगी दुख रहा. जब फिल्म निर्देशक आत्माराम ने भाई-बहन के रिश्ते पर रक्षाबंधन गीत लिखने को कहा तो उन्होंने इस गीत को बहुत दिल से लिखा और गाना इस कदर लोगों की ज़ुबान पर चढ़ा कि देश कि ऐसी कोई बहन नहीं होगी, जो रक्षाबंधन के दिन इस गीत को न गुनगुनाती हो.

शैलेंद्र ने 800 से ज्यादा गाने लिखे. राज कपूर की फिल्मों के अधिकतर गीत शैलेंद्र द्वारा ही लिखे गए थे. सभी गाने सुपर-डुपर हिट रहे. शैलेंद्र के गीतों के बोल जिस भी व्यक्ति की जुबान पर एक बार चढ़ गए, फिर कभी नहीं भूलते हैं. राजकपूर ने एक कार्यक्रम में ही उनकी कविता सुनकर उसे अपनी फिल्म के लिए खरीदने की पेशकश की थी, जिस पर शैलेंद्र ने बेधड़क कह दिया था कि ‘कविता बिकाऊ नहीं होती है.’ लेकिन आगे चलकर दोनों इतने अच्छे दोस्त बने कि लगातार सत्रह वर्षों तक आजीवन दोनों की दोस्ती बरकरार रही, लेकिन फिल्मों के ग्लैमर की चकाचौंध शैलेंद्र की प्रतिबद्धता और जनपक्षधरता को कभी विचलित नहीं कर सकी.

शैलेंद्र के कुछ गीतों को यदि उनके परिदृश्य और पटकथाओं से अलग हटाकर पढ़ा जाए तो यह बात आसानी से समझ आती है कि वह गीत आला दर्जे की साहित्यिक हैसियत रखते हैं. उनके गीतों की रेंज बहुआयामी है. उनके गीतों में भारतीयता की सोंधी महक, प्रेम की कोमल भावनाएं, संबंधों की उष्णता और जीवन दर्शन के अनेक पक्ष मौजूद हैं. उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से लोक परंपरा, लोक चेतना और लोक जीवन की उत्कृष्ट झांकियां अपने करिश्माई अंदाज़ में दिखाईं. वैसे तो उन्होंने जो भी लिख दिया वह लोकप्रिय होने के साथ-साथ लोगों के दिलों में हमेशा-हमेशा के लिए कैद होकर रह गया, लेकिन फिलहाल पढ़ें शैलेंद्र के वे दो खूबसूरत गीत, जिनकी तासीर कभी ठंडी नहीं पड़ती-

प्रेम पर लिखा गया शैलेंद्र का अमर गीत
फिल्म : श्री 420 (1955)
प्यार हुआ इक़रार हुआ है
प्यार से फिर क्यों डरता है दिल
कहता है दिल, रस्ता मुश्किल
मालूम नहीं है कहां मंज़िल
प्यार हुआ इक़रार हुआ…

कहो की अपनी प्रीत का मीत ना बदलेगा कभी
तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी
प्यार जो टूटा, साथ जो छूटा
चांद न चमकेगा कभी
प्यार हुआ इकरार हुआ…

रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियां
प्रीत हमारे प्यार की दोहराएंगी जवानियां
मैं न रहूंगी, तुम न रहोगे
फिर भी रहेंगी निशानियां
प्यार हुआ इक़रार हुआ…

रक्षाबंध पर लिखा गया शैलेंद्र का दिल छू लेने वाला गीत-
फिल्म : रेशम की डोरी (1974)
बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है
प्यार के दो तार से, संसार बांधा है
रेशम की डोरी से, रेशम की डोरी से
रेशम की डोरी से संसार बांधा है

सुंदरता में जो कन्हैया है, ममता में यशोदा मैय्या है
वो और नहीं दूजा कोई, वो तो मेरा राजा भैया है
बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है
प्यार के दो तार से, संसार बांधा है

मेरा फूल है तू, तलवार है तू, मेरी लाज का पहरेदार है तू
मैं अकेली कहां इस दुनिया में, मेरा सारा संसार है तू
बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है
प्यार के दो तार से, संसार बांधा है

हमें दूर भले किस्मत कर दे अपने मन से न जुदा करना
सावन के पावन दिन भैया बहना को याद किया करना
बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा है
प्यार के दो तार से, संसार बांधा है
रेशम की डोरी से, रेशम की डोरी से
रेशम की डोरी से संसार बांधा है

Tags: Bollywood, Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Lyricist

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