Saturday, May 18, 2024
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राहुल गांधी ने कानून का उल्लंघन किया, बाल आयोग का हाईकोर्ट में हलफनामा, नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की पहचान का मामला

नई दिल्ली. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 2021 में एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की ‘पहचान उजागर’ करने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पीड़िता की पहचान सुरक्षित रखने संबंधी कानून का उल्लंघन थे.

एनसीपीसीआर ने नाबालिग दलित पीड़िता के माता-पिता के साथ एक तस्वीर प्रकाशित करने के लिए राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका पर अदालत में एक हलफनामे में अपनी स्थिति स्पष्ट की. उसका कहना है कि इस तस्वीर के कारण लड़की की पहचान उजागर हुई. दलित बच्ची की 2021 में कथित तौर पर बलात्कार कर हत्या कर दी गई थी.

एनसीपीसीआर द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में कहा गया है, ‘राहुल गांधी ने नाबालिग लड़की की पहचान उजागर करते हुए अपने सोशल मीडिया खातों पर नाबालिग पीड़िता के माता-पिता के साथ अपनी मुलाकात की एक तस्वीर पोस्ट की. राहुल गांधी का ट्वीट/पोस्ट किशोर न्याय कानून, 2015 के प्रावधान का उल्लंघन है जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि परिवार की जानकारियों समेत ऐसी कोई जानकारी मीडिया के रूप में प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए जिससे किसी भी नाबालिग पीड़िता की पहचान हो सकती है.’

आयोग ने कहा कि किशोर न्याय कानून के अलावा बाल यौन अपराध संरक्षण (पोक्सो) कानून और भारतीय दंड संहिता में भी किसी नाबालिग पीड़िता की पहचान का खुलासा करना एक दंडनीय अपराध है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने एनसीपीआर से मार्च में सामाजिक कार्यकर्ता मकरंद सुरेश म्हाडलेकर की उस याचिका पर जवाब मांगा था, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एक दलित ब्च्ची की कथित रूप से पहचान उजागर करने को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई है.

नौ वर्षीय दलित बच्ची की एक अगस्त 2021 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. बच्ची के माता-पिता का आरोप है कि उसका बलात्कार कर हत्या कर दी और दक्षिण पश्चिम दिल्ली के ओल्ड नंगल गांव के श्मशान घाट में कर्मकांड कराने वाले व्यक्ति ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया. माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ‘ट्विटर’ ने अर्जी के जवाब में कहा था याचिका का अब कोई औचित्य नहीं बनता क्योंकि ट्वीट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया है और अब यह भारत में कहीं उपलब्ध नहीं है.

‘ट्विटर’ के वकील ने बताया था कि शुरू में राहुल गांधी के खाते को सोशल मीडिया मंच द्वारा निलंबित कर दिया गया था, लेकिन बाद में इसे बहाल कर दिया गया. मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव नरुला की पीठ ने बृहस्पतिवार को याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 23 नवंबर की तारीख तय की.

एनसीपीसीआर ने अपने हलफनामे में कहा कि कांग्रेस नेता द्वारा किए ‘गंभीर अपराध’ को देखते हुए उसने शिकायत दिल्ली पुलिस को भेजी थी तथा ट्विटर से पोस्ट हटाने और उनके ट्विटर हैंडल के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा था. हलफनामे में कहा गया है कि ट्वीट को भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया, लेकिन इसे हटाया नहीं गया और यह देश के बाहर उपलब्ध है. अत: ट्विटर की निष्क्रियता पीड़िता की पहचान उजागर करती है जो भारतीय कानूनों का उल्लंघन है.

शिकायत के जवाब में दिल्ली पुलिस ने सूचित किया कि उसने मामले पर संज्ञान लिया था जिसकी जांच उसकी अपराध शाखा कर रही है. पांच अक्टूबर 2021 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल की अगुवाई वाली पीठ ने इस याचिका पर ट्विटर को नोटिस जारी किया था जिसमें आरोप लगाया गया है कि राहुल ‘इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना से राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश’ कर रहे थे.

अदालत ने तब जनहित याचिका पर अन्य प्रतिवादियों यानी कि राहुल, दिल्ली पुलिस और एनसीपीसीआर को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया था. याचिका में एनसीपीसीआर द्वारा राहुल गांधी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करने का भी अनुरोध किया गया है.

Tags: DELHI HIGH COURT, Rahul gandhi

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