Thursday, May 23, 2024
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मणिपुर में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग, स्‍वाति मालीवाल ने भेजी सिफारिशें

नई दिल्‍ली. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने मणिपुर में चल रही हिंसक झड़पों के संबंध में भारत की राष्ट्रपति को अंतरिम सिफारिशें भेजी हैं. मणिपुर राज्य मई 2023 से जातीय संघर्षों से जूझ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई, कई घर, सांस्कृतिक स्थल और धार्मिक स्थल नष्ट हो गए और अनगिनत परिवारों का विस्थापन हो गया.

दो महिलाओं के साथ यौन हिंसा को दर्शाने वाले वायरल वीडियो के सामने आने के बाद दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सदस्य वंदना सिंह के साथ 23 जुलाई को चुराचांदपुर, मोइरांग, कोंगपोकपी और इंफाल जिलों सहित हिंसा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए मणिपुर की यात्रा की और वहां हिंसा से प्रभावित लोगों से बातचीत की. उन्होंने इन जिलों में विभिन्न राहत शिविरों का दौरा किया और देखा कि इन पीड़ित लोगों को कितनी गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने दिल्ली में कुछ महिलाओं और लड़कियों से भी बातचीत की जो हिंसा के दौरान मणिपुर से भाग गईं थीं. टीम ने राज्य के माननीय राज्यपाल से भी मुलाकात की.

रिपोर्ट में मणिपुरी महिलाओं की कठिनाइयों पर प्रकाश डाला गया है जिनके साथ दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष और सदस्य ने व्यक्तिगत रूप से बातचीत की. उदाहरण के लिए, आयोग 4 मई को इंफाल में कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार और हत्या की शिकार 21 और 24 वर्षीय लड़कियों के भाई से मिलने के लिए मणिपुर के हिंसा प्रभावित जिले कांगपोकपी में गया था. भाई ने बताया कि उन्हें अभी तक उनके शव नहीं मिले हैं क्योंकि वे अपनी जान को खतरा होने के कारण इंफाल की यात्रा करने में असमर्थ हैं. भाई ने बताया कि मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुआ है, और परिवार को कोई काउंसलिंग, कानूनी सहायता या मुआवजा नहीं मिला. 12 जून 2023 को राष्ट्रीय महिला आयोग को भेजी गई शिकायत में भी इस घटना का जिक्र था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

रिपोर्ट में एक स्वतंत्रता सेनानी की 80 वर्षीय विधवा की हत्या, मणिपुर सरकार की एक अवर सचिव और उनके बेटे की हत्या, दो नाबालिगों के लापता मामले और अन्य सहित कई अन्य घटनाएं शामिल हैं. रिपोर्ट में मणिपुर के बीजेपी विधायक पर भीड़ द्वारा किए गए क्रूर हमले का भी जिक्र है, जिसके परिणामस्वरूप उनका शरीर लकवाग्रस्त हो गया और उनके ड्राइवर की मौत हो गई. आयोग ने बताया है कि लगभग सभी मामलों में एक समानता यह है कि वायरल वीडियो के मामले को छोड़कर बाकी मामलों में शायद ही कोई गिरफ्तारी हुई है.

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि घाटी में कुकी-जोमी समुदाय से संबंधित सरकारी अधिकारियों सहित कोई भी व्यक्ति नहीं बचा है, और कुकी-जोमी के प्रभुत्व वाले क्षेत्रों में कोई मैतेयी नहीं है. राज्य में एक प्रभावी जनसांख्यिकीय और भौगोलिक विभाजन है क्योंकि हिंसा ने परिवारों को उनके लिए सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर पलायन करने के लिए मजबूर किया है.

राष्‍ट्रपति को भेजी 24 अंतरिम सिफारिशें 

आयोग ने इस प्रासंगिक मुद्दे पर माननीय राष्ट्रपति को 24 अंतरिम सिफारिशें दी हैं. इनमें राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाना, मुख्यमंत्री का इस्तीफा, और स्थिति का आकलन करने और राज्य में शांति लाने के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की तत्काल यात्रा शामिल है. दिल्ली महिला आयोग ने जातीय संघर्ष के मूल कारणों और संकट के प्रबंधन में सरकार के कार्यों और चूक की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक विशेष जांच दल की स्थापना का भी अनुरोध किया है. आयोग ने कहा है की यह जांच दल पुलिस बलों से 4000 से अधिक अत्याधुनिक हथियार लूटने, और पिछले तीन महीनों में पुलिस की निष्क्रियता या मिलीभगत के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच करे.

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में दो अलग-अलग एसआईटी की भी मांग की है, जिनमे से एक हत्या, लापता व्यक्तियों आदि के सभी मामलों की जांच की निगरानी करे और दूसरी विशेष रूप से यौन उत्पीड़न के मामलों को देखे. इसके अलावा, आयोग ने सिफारिश की है कि यौन हिंसा के सभी मामलों को सीबीआई को सौंप दिया जाना चाहिए, और सुनवाई राज्य के बाहर, विशेषकर दिल्ली में एक फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए. पीड़ित लोगों को उस राज्य में स्थानांतरण और पुनर्वास का विकल्प दिया जाना चाहिए जहां उनका मुकदमा चलेगा. उन्हें उचित परामर्श, कानूनी सहायता, आवास, सुरक्षा और आजीविका के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए. पीड़ित लोगों और उनके परिवारों को तत्काल 25 लाख रुपये का मुआवजा पैकेज प्रदान किया जाना चाहिए.

हेल्‍पलाइन शुरू करने की मांग
आयोग ने यौन हिंसा के मामलों की शिकायत दर्ज़ करवाने के लिए एक हेल्पलाइन शुरू करने की भी सिफारिश की है. इसमें कहा गया है कि यौन हिंसा का इस्तेमाल अक्सर संघर्ष क्षेत्र में कमजोर लोगों को अपमानित करने और आतंकित करने के लिए एक हथियार के रूप में किया जाता है. आशंका है कि पिछले तीन महीनों में मणिपुर में ऐसे कई मामले सामने आए होंगे. प्रशासन को तत्काल एक हेल्पलाइन स्थापित करनी चाहिए जो महिलाओं को यौन हिंसा के मामलों की शियाकत दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करे. सरकार को इस हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार करना चाहिए और गोपनीयता सुनिश्चित करनी चाहिए, क्योंकि कई महिलाएं और लड़कियां सामाजिक कलंक के डर से यौन अपराधों की रिपोर्ट करने के लिए आगे नहीं आ रही होंगी.

आयोग ने गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ-साथ उन बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए भी सिफारिशें दी हैं जो हिंसा के दौरान अनाथ हो गए होंगे. आयोग ने पर्याप्त सहायता की मांग की है, जिसमें काउंसलिंग, पौष्टिक भोजन, कपड़े, चिकित्सा सहायता, सैनिटरी नैपकिन, वेक्टर जनित बीमारियों से सुरक्षा और राहत शिविरों में बुजुर्गों, विकलांगों और अनाथ बच्चों के लिए विशिष्ट देखभाल प्रदान की जानी चाहिए.

ऑनलाइन कक्षाएं की जाएं शुरू
स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए आयोग ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने की सिफारिश की है. इसमें कहा गया है कि जो कॉलेज छात्र विस्थापित हो गए हैं, उनके लिए जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों में स्थित कॉलेजों में प्रवेश की सुविधा की व्यवस्था की जानी चाहिए. आयोग ने सभी प्रभावित जिलों में राहत सामग्री के निर्बाध प्रवाह की अनुमति देने के लिए सड़कों पर नागरिक नाकाबंदी पर रोक लगाने की भी मांग की है. इससे उच्च न्यायालय तक बेहतर पहुंच हो पायेगी जो वर्तमान में प्रतिबंधित है. मणिपुर के उन लोगों को मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान की जानी चाहिए जिन्हें न्यायिक हस्तक्षेप की तत्काल आवश्यकता है. अन्य सिफारिशों में शवों को परिवारों को लौटाना, हिंसा से बचने के लिए भाग गए मणिपुरी लोगों के लिए अन्य राज्यों में राहत शिविर स्थापित करना, इंटरनेट पर प्रतिबंध हटाने के अलावा आवागमन के लिए सभी जिलों और पड़ोस के शहर आइजोल तक हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू करना शामिल है.

राष्‍ट्रपति शासन लगाने की मांग
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने माननीय राष्ट्रपति से मिलने और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा करने के लिए भी समय मांगा है. उन्होंने कहा, ‘मणिपुर में स्थिति बहुत परेशान करने वाली है. सामान्य स्थिति और शांति बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है. मैंने माननीय राष्ट्रपति को एक अंतरिम रिपोर्ट और सिफारिशें सौंप दी हैं. मणिपुर के लोगों को तत्काल मदद की जरूरत है. मैंने माननीय राष्ट्रपति से मणिपुर में तुरंत राष्ट्रपति शासन लगाने और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जांच की निगरानी के लिए एसआईटी गठित करने का आग्रह किया है. मैंने माननीय राष्ट्रपति से सभी प्रभावित लोगों के लिए राहत और पुनर्वास का निर्देश देने का भी अनुरोध किया है.’

Tags: Manipur, Swati Maliwal

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