Thursday, May 23, 2024
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भारत की वो रहस्यमय घाटी, जिसका संबंध दूसरे लोक से कहा जाता है

हाइलाइट्स

इस घाटी को बरमूडा ट्राएंगल की तरह ही दुनिया की सबसे रहस्यपूर्ण जगह माना जाता है
चीन की सेना ने कई बार इस जगह का पता लगाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाई

भारत के सीमावर्ती इलाके में एक घाटी है, जिसका नाम है शांगरी-ला घाटी. ये तिब्बत और अरुणाचल की सीमा पर है. तंत्र मंत्र के कई जाने माने साधकों ने अपनी किताबों में इसका जिक्र किया है. जिसमें सबसे प्रमुख हैं पद्म विभूषण और साहित्य अकादमी से नवाजे गए और गर्वनमेंट संस्कृत कॉलेज वाराणसी के प्राचार्य रहे डॉ. गोपीनाथ कविराज. उन्होंने अपनी किताब में इस जगह का जिक्र किया है. तिब्बती साधक भी इसके बारे में कहते रहे हैं. इस घाटी को उस बरमूडा ट्राएंगल की तरह ही दुनिया की सबसे रहस्यपूर्ण जगह माना जाता है. कहा जाता है कि यहां भू-हीनता का प्रभाव रहता है. ये भी कहा जाता है कि इस घाटी का सीधा संबंध दूसरे लोक से है.

जाने माने तंत्र साहित्य लेखक और विद्वान अरुण कुमार शर्मा ने भी अपनी किताब “तिब्बत की वह रहस्यमय घाटी” में इस जगह का विस्तार से जिक्र किया है. बकौल उनके दुनिया में कुछ ऐसी जगहें हैं जो भू-हीनता और वायु-शून्यता वाली हैं, ये जगहें वायुमंडल के चौथे आयाम से प्रभावित होती हैं. माना जाता है इन जगहों पर जाकर वस्तु या व्यक्ति का अस्तित्व दुनिया से गायब हो जाता है. ऐसी ही जगहों के रूप में इस शांगरी ला घाटी का भी नाम आता है.

बरमूडा ट्रांएगल जैसी जगह
शांगरी-ला घाटी को बरमूडा ट्राएंगल की तरह बताया जाता है. बरमूडा ट्राएंगल ऐसी जगह है, जहां से गुजरने वाले पानी के जहाज और हवाई जहाज़ गायब हो जाते हैं. वह स्थान भी भू हीनता के क्षेत्र में आता है. कहा जाता है कि चीन की सेना ने कई बार इस जगह को तलाशने की भी कोशिश की लेकिन उसको कुछ नहीं मिला. तिब्बती विद्वान युत्सुंग के अनुसार इस घाटी का संबंध अंतरिक्ष के किसी लोक से है.

इस जगह को पृथ्वी का आध्यात्मिक नियंत्रण केंद्र भी कहा जाता है- सांकेतिक फोटो (pxhere)

तिब्बती किताबों में भी इसका जिक्र मिलता है
तिब्बती भाषा की किताब काल विज्ञान में इस घाटी का जिक्र मिलता है. जिसमें लिखा है कि दुनिया की हर चीज़ देश, काल और निमित्त से बंधी है लेकिन इस घाटी में घाटी में काल यानी समय का असर नहीं है. वहां प्राण, मन के विचार की शक्ति, शारीरिक क्षमता और मानसिक चेतना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. इस जगह को पृथ्वी का आध्यात्मिक नियंत्रण केंद्र भी कहा जाता है.

आध्यात्म क्षेत्र, तंत्र साधना या तंत्र ज्ञान से जुड़े लोगों के लिए यह घाटी भारत के साथ-साथ विश्व में मशहूर है. युत्सुंग खुद के वहां जाने का दावा करते हैं. वह बौद्ध साधना से जुड़े एक खास शख्सियत कहे जाते हैं. बकौल उनके वहां ना सूर्य का प्रकाश था और ना ही चांद की चांदनी. वातावरण में चारों ओर एक दुधिया प्रकाश फैला हुआ था और साथ ही विचित्र सी खामोशी.

यहां के साधना केंद्र प्रसिद्ध हैं
युत्सुंग ने वाराणसी के तंत्र विद्वान अरुण शर्मा को बताया  कि वहां एक ओर मठों, आश्रमों और विभिन्न आकृतियों के मंदिर थे और दूसरी ओर दूर तक फैली हुई शांगरी-ला की सुनसान घाटी. यहां के तीन साधना केंद्र प्रसिद्ध हैं. पहला- ज्ञानगंज मठ, दूसरा- सिद्ध विज्ञान आश्रम और तीसरा- योग सिद्धाश्रम. शांगरी ला घाटी को सिद्धाश्रम भी कहते हैं. सिद्धाश्रम का वर्णन महाभारत, वाल्मिकी रामायण और वेदों में भी है. सिद्धाश्रम का जिक्र काल विज्ञान पुस्तक, अंग्रेज़ लेखक James hilton ने अपनी किताब lost Horizon में भी किया है.

कई देशी-विदेशी खोजियों ने शांगरी ला घाटी का पता लगाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए- सांकेतिक फोटो

यहां जाने वालों का पता नहीं लगता
जेम्स हिल्टन ने अपनी पुस्तक “लास्ट होराइजन” में इस रहस्यमय घाटी के बारे में कहा, वहां लोग सैकड़ों बरसों तक जीवित रहते हैं. उनकी पुस्तक को पढ़कर कई देशी-विदेशी खोजियों ने शांगरी ला घाटी का पता लगाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए. कुछ तो हमेशा के लिए गायब ही हो गए. माना जाता है कि चीन की सेना एक लामा का पीछा करते हुए इस घाटी तक आई लेकिन शांगरी ला का पता नहीं लगा सकी.

कितनी लंबी है शांगरी-ला झील
इस इलाके को पंगासाऊ भी कहा जाता है, ये म्यांमार की सीमा के करीब है. शांगरी-ला की झील को करीब 1.5 किलोमीटर लंबा बताया लेकिन इस चौड़ाई के बारे में आमतौर पर कई अंदाज नहीं. क्योंकि इसकी चौड़ाई अलग अलग जगह है. हां इसकी अधिकतम चौड़ाई एक किलोमीटर तक है. प्राचीन समय में ये झील 2.5 किलोमीटर लंबी थी, जो स्तीलवेल रोड से शुरू होती थी, अब उसे लेदो रोड के नाम से जानते हैं.

शांगरी-ला घाटी में आकर वापस नहीं लौटने की एक बड़ी कहानी भी कही जाती है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान एक अमेरिकी विमान को यहां आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी, वो भी रात के समय, क्योंकि उन्हें ये इलाका सपाट लगा था, लेकिन इसमें बहुत से विमान के लोग मारे गए. तभी से इसे ऐसी झील कहा जाने लगा जहां जाने के बाद कोई लौटता नहीं.

तंगसा ट्राइब्स रहती है इस इलाके के करीब
इस इलाके में तंगसा ट्राइब्स रहती है. इस एरिया में रहने वाले लोगों को अक्सर यहां पर रहस्यमय आवाजें सुनाई देती हैं, वो भी आधी रात के समय के आसपास. कुछ लोगों का अंदाज है कि ये झील रहस्यमय भूचूंबकीय तरंगों से बंधी है, जिससे यहां की फोटोएं भी नहीं ली जा पातीं.

क्या है बरमुडा ट्राएंगल
अब थोड़ा बरमुडा ट्राएंगल के बारे में भी जानते चलें. बरमूडा एक ब्रिटिश उपनिवेश है, इसके आसपास के इलाकों में सैकड़ों जहाज डूबे माने जाते हैं. ये नार्थ अटलांटिक महासागर का वो हिस्सा है, जिसमें ढेरों रहस्य भरे पड़े हैं. यहां जाने वाले जहाजों के अलावा इसकी सीमा में जाने वाले हवाई जहाज भी एकाएक गायब हो जाते हैं. बीच-बीच में वैज्ञानिक कहते हैं कि वे इसका रहस्य खोलने तक पहुंच गए हैं लेकिन अब तक कोई भी ऐसा दावा नहीं कर सका.

Tags: Arunachal pradesh

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