Thursday, February 22, 2024
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कौन थीं भारत की वो राजकुमारी, जो ब्रिटेन में महिलाओं के वोटिंग राइट्स के लिए लड़ीं

भारतीय रियासतों में एक की राजकुमारी का महिला वोटिंग अधिकार आंदोलन में बड़ी भूमिका थी. उन्‍हीं के कारण ब्रिटेन की महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला था. इस आंदोलन के लिए उन्‍होंने अपना शाही दर्जा तक खतरे में डाल दिया था. लेकिन, समय के साथ इतिहास में उन्‍हें भुला दिया गया था. हालांकि, अब इस भारतीय राजकुमारी और ब्रिटिश महिलाओं के मताधिकार के लिए उनके संघर्ष को बच्‍चों की किताबों में जगह दे दी गई है. हम पंजाब के अंतिम सिख शासक महाराजा दलीप सिंह की बेटी सोफिया दलीप सिंह की बात कर रहे हैं.

महाराजा दलीप सिंह की बेटी सोफिया दलीप सिंह नॉरफॉक सफॉक सीमा पर मौजूद एलवेडीन में पली बढ़ी थीं. दरअसल, भारत में ब्रिटिश शासकों ने 1840 में महाराजा दलीप सिंह के साम्राज्‍य पर कब्‍जा करने के बाद उन्‍हें ब्रिटेन में निर्वासित कर दिया था. इसके बाद दलीप सिंह की भारत लौटने की हर कोशिश असफल रही. इसके बाद उन्‍होंने मुआवजे की रकम से एलवेडीन हॉल खरीद लिया था. इसी में वह अपने बच्‍चों के साथ रहे. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजकुमारी सोफिया ने 1900 के दशक में महिलाओं को वोटिंग राइट्स दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी थी.

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ब्रिटेन में ब्रिटिश साम्राज्‍य के खिलाफ आंदोलन
महाराजा दलीप सिंह का परिवार ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के काफी करीब था. इसीलिए महारानी विक्टोरिया ने हैम्‍पटन कोर्ट पैलेस में इस राजपरिवार को एक अपार्टमेंट भी दिया था. सोफिया दलीप सिंह को महारानी की गॉडडॉटर कहा जाता था. लिहाजा, शुरुआती वर्षों में राजकुमारी सोफिया ब्रिटिश महिलाओं की तरह जीवन जी रही थीं. समय के साथ उन्‍हें लगा कि उन्‍हें ब्रिटेन में महिलाओं के अधिकारों के लिए कुछ करना चाहिए. वह वीमेन सोशल एंड पॉलिटिकल यूनियन और वीमेन टैक्‍स रेजिस्‍टेंस लीग की सदस्‍य रहीं. इसी लीग ने महिलाओं के मताधिकार के लिए ‘वोट नहीं तो टैक्‍स नहीं’ का नारा दिया.

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महाराजा दलीप सिंह का परिवार ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के काफी करीब था. (Image: Wikipedia)

ब्रिटिश संसद के सामने सोफिया का प्रदर्शन
राजकुमारी सोफिया ने 400 महिलाओं के साथ 1910 में ब्रिटेन के संसद भवन के सामने जबरदस्‍त प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में महिला मताधिकार कार्यकर्ता एमेलीन पेनखर्स्‍ट भी शामिल थीं. इसी प्रदर्शन को बाद के समय में ‘ब्‍लैक फ्राइडे’ कहा गया. राजकुमारी सोफिया नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन में शामिल होने तक ही सीमित नहीं रहीं. वह हैम्‍पटन कोर्ट पैलेस में अपने घर के बाहर महिला मताधिकार के समर्थन में निकलने वाला अखबार भी बेचती हुई पाई जाती थीं. इसकी वजह से उन्‍हें और उनके परिवार को कई बार अजीब हालात का सामना भी करना पड़ा था.

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लाला लाजपत राय से थीं बहुत ज्‍यादा प्रभावित
महाराजा रणजीत सिंह की पोती राजकुमारी सोफिया के कारण ब्रिटिश महिलाओं को मतदान का अधिकार हासिल हुआ. उनका जन्म 1876 की गर्मियों में हुआ था. वह पहली बार 1903 में भारत आई थीं. यह उनके जीवन का अहम मोड़ था. वह एक निरंकुश औपनिवेशिक प्रशासन के तहत अपने साथी नागरिकों के इलाज से चिंतित थीं. राजकुमारी कई भारतीय क्रांतिकारियों के काम से प्रभावित थीं. वह देशद्रोह के आरोप में कैद लाला लाजपत राय से सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुई थीं. लाला लाजपत राय के काम ने सोफिया को ब्रिटिश राज के खिलाफ जाने के लिए प्रेरित किया. वह आगे की लड़ाई के लिए इंग्लैंड लौट गईं. वहां वह महिला मताधिकार आंदोलन का एक अहम हिस्सा बन गईं.

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इंग्‍लैंड में सोफिया को नापसंद करने वाले बढ़े
विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के कारण इंग्लैंड में राजकुमारी सोफिया को नापसंद करने वालों की संख्‍या भी बढ़ती जा रही थी. उन्होंने इसकी कोई परवाह नहीं की. उन्होंने महिलाओं को मतदान का अधिकार के अलावा एशियाई नाविकों, महिलाओं के विकास, हिंदुस्तान की आजादी और 1914 में हुए प्रथम विश्‍व युद्ध के पश्चिम मोर्चे पर घायल हुए भारतीय सैनिकों के लिए अहम काम किया. कुछ साल पहले उनके लिए ब्लू फ्लैक सम्मान की भी घोषणा की गई. संघर्ष के लिए हमेशा तैयार रहने वाली राजकुमारी सोफिया का देहांत 71 साल की उम्र में 1948 में हुआ था.

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राजकुमारी सोफिया हैम्‍पटन कोर्ट पैलेस में अपने घर के बाहर महिला मताधिकार के समर्थन में निकलने वाला अखबार भी बेचती थीं. (Image: Wikipedia)

क्‍या कहती हैं किताब की लेखक सोफिया
सोफिया के भाई फ्रेडरिक दलीप सिंह ने 1921 में नॉरफॉक के थेटफर्ड में संग्रहालय बनाया. एंशिएंट हाउस म्यूजियम में ‘मॉय स्टोरीः प्रिंसेज सोफिया दलीप सिंह’ नाम की किताब लांच की गई है. ये किताब 9 से 13 साल के बच्चों के लिए लिखी गई है. इसकी लेखिका अहमद ने बीबीसी से कहा कि मैं उनके बारे में बहुत ज्‍यादा नहीं जानती थी. जब मुझे पता चला कि उनके जैसी एक महिला थी, जो मताधिकार के लिए लड़ी तो मैं बहुत प्रभावित हुई. हम स्कूल में जिन लोगों के बारे में पढ़ते हैं उन्हें जीवन भर याद रखते हैं. मेरे लिए ऐसी ही एक महिला फ्लोरेंस नाइटिंगेल थीं. उम्मीद है मिक राजकुमारी सोफिया की कहानी बच्चों को प्रेरित करेगी. वह शर्मीली थीं, लेकिन फैशनेबल थीं.

Tags: British Raj, British Royal family, History, Revolutionary Freedom Fighter

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